नवरात्र विशेष -दिन में तीन रूप बदलने वाली माँ के 450 साल पुराने मन्दिर में दर्शन के लिए वर्ष भर लगा रहता श्रद्धालुओं का तांता

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दिलीप पाल 

आमला. माँ रेणुका तीन बार रूप बदलती है छावल धाम की रेणुका माता कहने को मां दुर्गा के नौ स्वरूप है, लेकिन उनकी महिमा और उनसे जुड़ी कथा अपरम्पार है। आदि शक्ति मां भगवती का ऐसा ही एक अनोखा मन्दिर मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की आमला तहसील से 10 किमी दूर छावल गांव है। यहां स्थित माँ रेणुका का मंदिर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर का इतिहास करीब 450 साल पुराना है। छोटी सी पहाड़ी पर बने मन्दिर माँ रेणुका की प्राकट्य प्रतिमा है। मान्यता है कि यहां स्थित मन्दिर में एक दिन में देवी तीन रूप बदलती है। आमला ब्लाक के 10 किमी दूर स्थित छावल गांव में माँ के इस मंदिर को छावल धाम के नाम से जाना जाता है।

स्थानीय मान्यता के अनुसार माँ रेणुका की प्रतिमा सुबह से लेकर शाम होने तक तीन रूप में नजर आती है।

सुबह नन्हीं बालिका का स्वरूप तो दोपहर में माँ के चेहरे का तेज बढ़ जाता है।

शाम को मां रेणुका ममतामयी सौम्य करुणा में रूप में नजर आने लगती है।

कथाओं के अनुसार पहाड़ी पर बना यह मन्दिर लगभग 450 साल पुराना है। मां रेणुका की जो
तीन बार रूप…के दरबार के पास अखण्ड ज्योति प्रज्वलित करने आते है। इन स्थानों पर भी विराजी है मां रेणुका प्रतिमा मन्दिर में स्थापित है। वह यहीं से प्रकट हुई थी। मन्दिर के प्रारंभ से लेकर अब तक गोस्वामी परिवार ही यहा पूजा करता चला आ रहा गोस्वामी परिवार की ये पांचवी पीढ़ी है। जो मन्दिर के साथ-साथ देख-रेख का भी काम करती है। मन्दिर के पुजारी बताते है कि 60 साल से मंदिर में अखण्ड ज्योति प्रज्वलित है। ग्रामीण सहित बाहर से आने वाले श्रद्धालु माँ रेणुका की कृपा के गवाह है। नवरात्र में दूर-दूर से श्रद्धालु माता छावल गांव के अलावा मां रेणुका महाराष्ट्र के माहुरगढ़, भैंसदेही के धामनगांव, बिसनोर और मासोद में है। माता के दरबार में जो भी विवाहित स्त्री संतान प्राप्ति के लिए मन्नत मांगती है, उसकी मन्नत माता रानी जरूर पूरी करती है। माँ के दरबार में वर्षों से जल रही अखण्ड ज्योति का तेल शरीर पर लगाने से कैंसर तक ठीक हो जाता है। मन्दिर आकर कैंसर के मरीज ठीक हो जाते है। मां के चमत्कार की वजह से यहां सालभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। कहते है कि जिस पर माता रानी की कृपा होती है वही यहां आकर मातारानी के दर्शन

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