राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का कटनी कनेक्शन आज भी सुरक्षित है वह कमरा, जिसमें ठहरे थे महात्मा गांधी, वर्ष 1933 में आए थे कटनी

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,सुनील यादव कटनी 

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने आजादी के आंदोलन में कटनी पहुंचकर भी लोगों में देशप्रेम का जज्बा भरा था। बापू ने कटनी में एक रात बिताई थी और स्कूल के जिस कमरे  में राष्ट्रपिता ठहरे थे, उस कमरे को उनकी निशानी के तौर पर आज भी सुरक्षित रखा गया है। बापू ने रात रूकने के बाद दूसरे दिन फारेस्टर प्लेग्राउंड के पास सभा की थी और उसके बाद तहसीलदार को ज्ञापन भी सौंपा था। जिस रास्ते से होकर वे सभा स्थल तक गए थे, वहां पर उनकी याद में आज भी गांधीद्वार बना हैं, जो उनके कटनी आने की निशानी है।

मनीष दुबे शिक्षक शासकीय तिलक राष्ट्रीय विद्यालय

आजादी के लिए आंदोलन के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी वर्ष 1933 में कटनी आए थे। जहां सैकड़ो की संख्या में आजादी के दीवानों ने उनका स्वागत किया था और घंटाघर से जगन्नाथ चौक के बीच बने शासकीय तिलक राष्ट्रीय स्कूल के कमरे में बापू को ठहराया गया। जिस कमरे में बापू ने रात बिताई थी, उसे याद के रूप में आज तक स्कूल ने संजो कर रखा है। स्कूल के कमरे के अलावा अपनी यात्रा के दौरान गांधीजी जिस मार्ग से सभा स्थल तक गए थे, उस रास्ते में उनकी निशानी के तौर पर गांधीद्वार बनाया गया था, जो आज भी शहर में यादगार के रूप में सुरक्षित है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हरिजन उद्धार यात्रा को लेकर वर्ष 1933 में आए थे। कमरे में रात्रि विश्राम के बाद बापू सुबह होते ही यात्रा पर निकल पड़े थे और सीधे फारेस्टर प्लेग्राउंड पहुंचकर जनमानस को संबोधित किया था। उनके आव्हान पर जिले से भी हजारों की संख्या में लोग आजादी की लड़ाई में शामिल हुए थे। कटनी के लोगों में आजादी को लेकर उत्साह देखकर बापू ने मुड़वारा कटनी को बारडोली का भी नाम भी उसी दौरान दिया था। सभा के बाद तहसील कार्यालय पहुंचकर गांधीजी ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा था।