गांधी और शास्त्री के विचारों की मान्यता सिर्फ देश में ही नहीं विदेशों में भी है ।

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रोहित नैय्यर ब्यूरो 

जबलपुर शहर कांग्रेस कमेटी के द्वारा 2 अक्टूबर को सुबह 10 बजे गांधी भवन टाउन हॉल प्रतिमा स्थल पर देश के महान नेता द्वय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पुष्पांजलि कर संगोष्ठी के साथ मनाई गई ।

कांग्रेस नेताओं ने अपने उद्बोधन में दोनों नेताओं के जीवन से जुड़े अनेक पहलुओं पर विचार रखें और याद किया कि देश की स्वतंत्रता के लिए उनका समर्पण प्रेरणादायक रहा । वह एक सच्चे देशभक्त के साथ सिद्धांतिक सामाजिक गुणों से परिपूर्ण मानव रहे हैं। यथार्थ के जीवन जीने की कला को वे जानते थे । आज यही कारण है कि देश ही नहीं विश्व के अनेक राष्ट्र उनके विचारों को आत्मसात करते हैं । शास्त्री जी का वह नारा जय जवान जय किसान आज भी उनकी याद कराता है। सादगी ही उनकी सबसे अनमोल पूजी रही है।

दिनेश यादव कांग्रेस नगर अध्यक्ष

गांधीजी के सामाजिक विचारों में उनके समाज की बुनियाद अहिंसा पर टिकी थी। इसलिए वे अपने आदर्श राज्यों को अहिंसात्मक समाज कहकर पुकारते हैं। उनका मानना था कि सभी समस्याओं की जड़ मनुष्य की हिंसात्मक प्रवृत्ति है। अतः समाज में हिंसा के किसी भी रूप को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए ।

उन्होंने प्राचीन भारतीय संस्कृति और सभ्यता की समृद्ध ज्ञान परंपरा से जनित विश्व-बंधुत्व, परहित-सेवा, सभी के सुख और स्वास्थ्य की कामना जैसे शाश्वत मानवीय मूल्यों को पूर्णरूपेण आत्मसात किया। समय के साथ वे विश्व पटल पर निडर कर्मयोगी के अप्रतिम उदाहरण बनकर उभरे।

वह परंपराओं में विश्वास करते थे । लेकिन उनके विचार अभिनव और क्रांतिकारी थे । उनका मानना था कि धार्मिक भावनाओं से संचालित व्यक्ति कभी किसी प्रकार का अन्याय सहन नहीं करता । जहां भी मानवता पर कोई अन्याय हो नैतिकता और धर्म का तकाजा यही है कि तुरंत उसको मिटाने का प्रयास किया जाए ।

‘स्व’ का अर्थ है स्वयं और ‘देश’ का अर्थ है देश। स्वदेशी का अर्थ अपने देश से है, लेकिन व्यवहारिक संदर्भों में इसका अर्थ आत्मनिर्भरता के रूप में लिया जा सकता है। गांधी जी का मानना ​​था कि इससे स्वतंत्रता (स्वराज) को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि भारत का ब्रिटिश नियंत्रण उनके स्वदेशी उद्योगों के नियंत्रण में निहित था।

मनुष्य का सबसे बड़ा गुण है, आत्मनिर्भरता तथा सबसे बड़ा अवगुण है, स्वावलंबन का अभाव ।
महात्मा गांधी जी का राजनीतिक व आर्थिक विचारों के साथ-साथ सामाजिक सुधार के क्षेत्र वर्तमान में गांधी के विचारों की प्रासंगिकता और
सत्याग्रह की अवधारणा को समझाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में शहर कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश यादव पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया विधायक विनय सक्सेना पूर्व विधायक नन्हे लाल धुर्वे वरिष्ठ नेता आलोक मिश्रा कैलाश तिवारी झल्लेलाल जैन मुकेश राठौर रामदास यादव राजेश सोनकर अनुराग गढ़वाल श्रीमती रेखा विनोद जैन इंदिरा पाठक तिवारी श्वेता दुबे, पुष्पा पटेल कमलेश यादव ममता तिवारी कमला चौहान मीनाक्षी स्वामी दीपमाला सिलावट बबुआ शुक्ला टीकाराम कोस्टा ब्लॉक अध्यक्ष शिव कुमार चौबे राजेंद्र पिल्ले, मनोज नामदेव कीर्ति चौहान एडवोकेट संपूर्ण तिवारी बृजेश दुबे, जितेंद्र यादव यतनेश सोनी दीपक अग्रवाल दुर्गेश पटेल अशरफ खान रुपेंद्र पटेल , पार्षद भगत राम सिंह अभिषेक यादव गुड्डू नवीन रिजवान कोटी शिव सोनी हनुमंतराव रज्जू सराफ संजय वर्मा मनोज नामदेव आयुष अग्रवाल मुख्तार अंसारी श्याम सोलंकी सोनू तिवारी राजेश चौबे रमेश वेन,पूनम सोनकर आदि उपस्थित रहे