इटारसी अभिभाषक संघ के द्विवार्षिक चुनाव आज

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मनीष मालवीय इटारसी 

इटारसी //  अभिभाषक संघ के चुनावों में अब कम समय बचा है। संघ के कुछ मुख्य पदों पर ही मुकाबला होना है, क्योंकि कुछ पदों पर निर्विरोध निर्वाचन हो चुका है। अब केवल अध्यक्ष और वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर त्रिकोणीय मुकाबला होना है तथा सचिव पद पर आमने सामने की दावेदारी है।
अभिभाषक संघ की बागडोर किन हाथों में होगी, आज शाम तक पता चल जाएगा। पिछले करीब दस दिनो से लगातार इन पदों के प्रत्याशियों ने मतदाता अधिवक्ताओं से अपने पक्ष में मतदान के लिए निवेदन किया है। केवल तीन पदों के लिए होने वाले मुकाबले की दिलचस्प बात यह है कि इसमें पर्दे के पीछे से कई राजनीतिक दिग्गज अपने प्रत्याशियों का समर्थन कर रहे हैं तो कई तो सड़क पर आकर प्रचार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि जीत में वे मतदाता अधिवक्ता मुख्य भूमिका निभाएंगे जो कोर्ट में वकालात नहीं कर रहे हैं। जिसने भी इनको साध लिया तो समझो अपनी जीत पक्की कर ली। हालांकि ऐसे मतदाताओं की संख्या सौ के आसपास है। लेकिन जो लोग प्रेक्टिस कर रहे हैं, वे तो अलग-अलग धड़े में बंटे हैं, ये अपने-अपने गुट में ही मतदान करेंगे। लेकिन, जो बाहर हैं उनको साध लिया तो मैदान जीत लिया जैसी बातें निकलकर सामने आ रही हैं।
इस बार अध्यक्ष पद पर अधिवक्ता संतोष गुरयानी पर पूर्व अध्यक्षों ने बड़ा दांव खेला है। सीधे तौर पर तो यहां राजनीतिक दखल नहीं है, लेकिन पर्दे के पीछे भाजपा और कांग्रेस के नेता सक्रिय हैं। इटारसी अभिभाषक संघ के द्विवार्षिक चुनाव आज 26 सितंबर 2021 दिन रविवार को होंगे जिसमें सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक मतदान होगा। इसके बाद आज ही मतगणना भी होगी और परिणाम भी घोषित किये जाएंगे।

चार प्रत्याशी निर्विरोध

अधिवक्ता संघ के चुनाव में नाम वापसी के बाद 4 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं जिनमें कोषाध्यक्ष राजेन्द्र मालवीय , ग्रंथपाल राजेश नामदेव , कनिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश उपाध्याय एवं सहसचिव अजय चौधरी हैं। अब 3 पदों पर वोट पड़ेंगे जिनमें अध्यक्ष पद पर संतोष गुरयानी, सत्यनारायण चौधरी और संजय त्रिपाठी के मध्य, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर विनोद भावसार, आनंद चौकसे और अनिल शुक्ला के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा। सचिव पद पर सुमेर सिंह चौहान और पारस जैन आमने-सामने हैं।

निर्विरोध निर्वाचित कार्यकारिणी में 5 सदस्यों में भी 4 सदस्य गुरयानी पैनल के निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। अब मतगणना का परिणाम किसके पक्ष में जाएगा, यह अभी भी कहना मुश्किल है, क्योंकि मतदाता अधिवक्ताओं की चुप्पी कुछ भी स्पष्ट नहीं कर रही है। ऐसे में अधिवक्ता संघ की बागडोर किसके हाथ जाएगी, यह जानने के लिए शाम तक ही इंतजार करना होगा।