निजी अस्पतालों ने बनाया ड्यूटी एंबुलेंस और डॉक्टरों के नामों को भी कमाई का जरिया

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रोहित नैय्यर ब्यूरो 

जबलपुर -मरीजों की सेवा करने के लिए लगी एंबुलेंस और डॉक्टरों के नामों को भी कमाई का कुछ लोगों ने जरिया बना लिया है, ताजा मामला जबलपुर का है, जहां पैसों की लालच में अंधे हो चुके एक निजी अस्पताल (संस्कारधानी अस्पताल)ने एक दिल के मरीज के साथ न केवल ठगी की,बल्कि मरीज को गलत जानकारी देकर कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर को पहले तो अस्पताल में सेवारत बताया,और फिर झूठी जानकारी के आधार पर हार्ट पेशेंट मरीज को अपने अस्पताल में कई दिनों तक भर्ती रखा, मामले का खुलासा होने के बाद मरीज के परिजनों ने मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में कर निजी अस्पताल पर कार्यवाई की गुहार लगाई है,दरअसल जबलपुर के पड़ोसी जिले दमोह के रहने वाले वीरेंद्र नायक की माँ हृदय रोग से पीड़ितबीते दिनों रानी नायक की अचानक तबियत खराब होने पर परिजनों ने रानी नायक को दमोह में एक डॉक्टर को दिखाया,प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टर ने रानी नायक को जबलपुर ले जाकर कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर पुष्पराज पटेल को दिखाने की सलाह देते हुए रेफर कर दिया,जिसके बाद वीरेंद्र नायक एम्बुलेंस से अपनी माँ रानी नायक को इलाज कराने जबलपुर लेकर आ गए,

लेकिन एम्बुलेंस वाले की निजी अस्पताल (संस्कारधानी अस्पताल) के संचालक से सांठगांठ थी,मोटे कमीशन के बदले एम्बुलेंस चालक रानी नायक को कार्डियोलॉजिस्ट डॉ पुष्पराज पटेल के पास न ले जाकर संस्कारधानी अस्पताल ले गया,जहां संस्कारधानी अस्पताल के कर्मचारियों ने मरीज रानी नायक को यह कहकर अस्पताल में भर्ती कर लिया,कि कार्डियोलॉजिस्ट डॉ पुष्पराज संस्कारधानी अस्पताल में सेवारत है,और वह उसका ईलाज यही अस्पताल में कर देगें,जिसके बाद रानी नायक को परिजनों ने संस्कराधानी अस्पताल में भर्ती कर दिया,इस दौरान अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी मरीज के परिजनों से ईलाज़ के नाम पर बड़ी रकम भी वसूल कर ली,

लेकिन जब परिजन लगातार अस्पताल प्रबंधन से कार्डियोलॉजिस्ट डॉ पुष्पराज पटेल से ईलाज़ और उनसे बात करने की जिद करने लगे,तब उन्हें इस फर्जीवाड़े का पता लगा कि डॉ पटेल इस हॉस्पिटल में आते ही नहीं हैं,परिजनों की माने तो आजाद रानी नायक को कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर पुष्पराज पटेल से इलाज कराने के नाम पर एडमिट किया गया था, इतना ही नहीं ईलाज के नाम पर उनसे 40 हजार रुपए भी ले लिए गए,और जब मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज करने कहा गया,तो अस्पताल प्रबंधन ने आनाकानी करते हुए धमकियां भी देने का काम किया,जिसके बाद पीड़ित परिजनों ने मामलों की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में की है,और तब कहीं मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दूसरे अस्पताल में भर्ती किया गया है।