उच्च शिक्षा विभाग भोपाल के अधिकारियों की मनमानी चरम पर…

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हेमंत वर्मा 

उच्च शिक्षा विभाग भोपाल के अधिकारियों की मनमानी चरम पर…
फॉलन आउट अतिथि विद्वानों के लिए प्रस्तावित चयन प्रक्रिया में कार्यरतों और स्टार वाले नए अभ्यर्थियों को नियम विरुद्ध किया चयनित…
फॉलन आउट अतिथि विद्वानों ने उच्च शिक्षा मंत्री एवं नवागत कमिश्नर से की मामले की शिकायत…

भोपाल l उच्चशिक्षा विभाग भोपाल अक्सर सुर्खियों में बना रहता हैं ये बात नई नही हैं l ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया हैं l उच्चशिक्षा विभाग अंतर्गत प्रदेश भर में संचालित समस्त शासकीय महाविद्यालयों में छात्रों की 50 फीसदी उपस्थिति के साथ भौतिक कक्षाएँ विभाग द्वारा बीती दिनाँक 15 सितंबर से प्रारंभ कर दी गई हैं l महाविद्यालयों में अध्यापन की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए विभाग द्वारा अतिथि विद्वानों के आमंत्रण हेतु पत्र जारी किया था जिसके तहत बीती दिनाँक 09 सितंबर को मेरिट सूची प्रकाशित हुई और आगामी 20 सितंबर तक चयनितों को महाविद्यालय में पदस्थापित होने की अंतिम तिथि निर्धारित की हैं l
उक्त आमंत्रण प्रक्रिया से फॉलन आउट अतिथि विद्वानों का एक बड़ा खेमा नाराज और आक्रोशित हैं उनका कहना हैं कि उच्चशिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मनमानी कर नियम विरुद्ध अनैतिक ढंग से सैकड़ों कार्यरत अतिथि विद्वानों और स्टार वाले नवीन अभ्यर्थियों का चयन कर हम फॉलन आउट अतिथि विद्वानों के साथ अन्याय किया हैं है हमे रोजगार विहीन करने का षड्यंत्र किया हैं l नाराज और आक्रोशित फॉलन आउट अतिथि विद्वानों के समूह ने माननीय उच्चशिक्षा मंत्री और नवागत कमिश्नर से भेंट कर उक्ताशय में अवगत कराते हुए शिकायत दर्ज कराई l
मामले से ये तो स्पस्ट है कि, यह अब तक का यह अकेला ऐसा पहला मामला है कि, शासकीय विभाग में कार्यरत गेस्ट फेकल्टी को उनके मनपसंद और गृह स्थान के समीप वाले महाविद्यालय में पदस्थापित करने के लिए सुविधा दी गई हो मतलब की गेस्ट फेकल्टी जब चाहे अपने पसंदीदा महाविद्यालय में पदस्थापित हो सकता हैं l मगर बड़ा सवाल यह कि, विभाग द्वारा ऐसी सुविधा शासकीय प्राध्यापकों को क्यों नही दी जा रही हैं? क्या शासकीय प्राध्यापकों से अहम और विशिष्ट हैं अतिथि विद्वान (गेस्ट फेकल्टी )? शासकीय विभाग में कौन सा ऐसा मानवीय आधार का नियम हैं जो कार्यरत अतिथि विद्वानों (गेस्ट फेकल्टी) पर ही लागू हैं, शासकीय प्राध्यापकों और फॉलन आउट अतिथि विद्वानो पर नहीं?
ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली पर संदेह और सवालिया निशान लाज़िम हैं l

क्या है पूरा मामला

◆ विभाग के अधिकारियों ने अपने ही पत्र कि, की अवहेलना…

पीएससी से चयनित सहायक प्राध्यापकों की पदस्थापना के कारण विगत 2 वर्षों से फॉलन आउट अतिथि विद्वानों के लिए
और विभाग द्वारा प्रक्रिया अंतर्गत कराए गए प्राध्यापकों के स्थानांतरण से प्रभावित फॉलन आउट अतिथि विद्वानों के लिए प्रस्तावित विभाग द्वारा जारी पत्र क्रमांक 1431/398/आउशि/शाखा-2/2021 भोपाल दिनाँक 27/08/2021 के तहत अतिथि विद्वान आमंत्रण प्रक्रिया सत्र 2021 – 22 के लिए कैलेंडर जारी किया था जिसमें स्पस्ट उल्लेख किया गया था कि, उक्त आमंत्रण प्रक्रिया नवीन पदस्थापना और स्थानांतरण से प्रभावित फॉलन आउट अतिथि विद्वानों के लिए प्रस्तावित हैं l विभाग के अधिकारियों ने अपनी मनमानी और मिलीभगत से वर्तमान में कार्यरत अतिथि विद्वानों को उनके मनपसंद और निवास के समीप वाले महाविद्यालय में आने हेतु नियम विरुद्ध मंगणत मानवीय आधार का हवाला देकर फॉलन आउट कर आईडी पासवर्ड जारी किए इसके साथ ही नवीन अभ्यार्थी जिन्होंने कभी भी किसी महाविद्यालय में नही पढ़ाया उन्हें स्टार * वाले नवीन अभ्यर्थियों को आईडी पासवर्ड जारी कर आमंत्रण प्रक्रिया में शामिल किया नतीजा यह रहा कि दिनाँक 09 सितंबर को जारी मेरिट लिस्ट में लगभग 40 – 50 कार्यरत अतिथि विद्वान और तकरीबन 40 – 50 स्टार वाले नवीन अभ्यर्थियों चयन हो गया तथा उन्हें महाविद्यालय भी आवंटित करा दिए गए जिसके कारण वास्तविक हक़दार लगभग 100 या इससे अधिक फॉलन आउट अतिथि विद्वान चयनित न हो सके और रोजगार से वंचित हो गए साथ ही विगत दो वर्षों से प्रतीक्षारत फॉलन आउट अतिथि विद्वानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया l अपने साथ हुए अन्याय से फॉलन आउट अतिथि विद्वान बेहद हताश और आक्रोशित हैं l

◆ पीड़ित फॉलन आउट अतिथि विद्वानों के एक बड़े समूह ने उच्चशिक्षा मंत्री और नवागत कमिश्नर से लगाई न्याय की गुहार…उच्चशिक्षा मंत्री और कमिश्नर ने दिया जांच का आश्वासन…

गौरतलब हैं कि, विभागीय अधिकारियों द्वारा मनमाने ढंग से और नियम विरुद्ध अतिथि विद्वान आमंत्रण प्रक्रिया सम्पन्न क…