11 सितंबर 1893 को शिकागो में स्वामी विवेकानंद का भाषण ऐतिहासिक था – शिव वर्मा

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हेमंत वर्मा 
राजनांदगांव। जिला भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिलाध्यक्ष व पार्षद दल के प्रवक्ता शिव वर्मा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में भाषण देकर लोगों को भारत दर्शन कराएं। 11 सितंबर की तारीख को अब दो घटनाओं के कारण याद किया जाता है। पहली घटना 11 सितंबर, 1893 की है, जब स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो शहर में आयोजित धर्म संसद में प्रसिद्ध भाषण दिया था। उसमें पूर्व के चिंतन के बारे में पश्चिम को बताया। शायद यही वह कारण है जिसकी वजह से आज भी स्वामी विवेकानंद का वह भाषण सामयिक और प्रासंगिक बना हुआ है। शिकागो में विश्व हिंदू सम्मेलन के मंच पर स्वामी विवेकानंद ने अपने संबोधन में सांप्रदायिकता, धार्मिक कट्टरता और हिंसा का का मुद्दा बखूबी उठाया था। उन्होंने कहा था कि सांप्रदायिकता और कट्टरता लंबे वक्त से धरती को अपने शिकंजे में जकड़े हुए है और पृथ्वी को हिंसा से भर दिया है। अनेकों बार यह धरती खून से लाल हुई है। कितनी ही सभ्यताओं का विनाश हुआ है और न जाने कितने देश नष्ट हुए हैं। उन्होंने पूर्व की अगुवाई करते हुए कहा कि सहनशीलता का विचार पूरब के देशों से आया और दूर-दूर तक फैला।

श्री वर्मा ने आगे कहा कि दूसरी घटना 11 सितंबर, 2001 की है। जब अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर अलकायदा ने आतंकी हमला कर उसको जमींदोज कर दिया था। इस हमले के बहुत पहले ही स्वामी विवेकानंद ने यह बात कही थी कि दुनिया में धर्म के नाम पर सबसे ज्यादा रक्तपात हुआ है। कट्टरता और सांप्रदायिकता मानवता के सबसे बड़े दुश्मन स्वामी विवेकानंद ने अपने भाषण में सहनशीलता और सार्वभौमिकता का मसला भी उठाया था। आज शिकागो में स्वामी विवेकानंद के मशहूर भाषण के सवा सौ साल से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने जिन मुद्दों पर प्रकाश डाला था, वे आज भी मौजूद हैं और उनका भाषण आज भी उतना ही प्रासंगिक है।