1857 की क्रांति में जबलपुर…. वीर क्रांतिकारियों के बलिदान से हमे प्रेरणा मिलती है :- राकेश सिंह

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रोहित नैय्यर ब्यूरो 

1857 की क्रांति में जबलपुर….

वीर क्रांतिकारियों के बलिदान से हमे प्रेरणा मिलती है :- राकेश सिंह

164 वर्षों बाद आदिवासी जननायक राजा शंकरशाह रघुनाथ शाह की बलिदान गाथा का बलिदान स्मृति यात्रा के माध्यम से हुआ जीवंत दृश्यांकन

जबलपुर। स्वतंत्रता के प्रथम आंदोलन 1857 की क्रांति में देश के प्रथम बलिदानी राजा शंकरशाह एवँ कुँवर रघुनाथशाह की बलिदान गाथा का जीवंत दृश्यांकन करते हुए 164 वर्षों बाद उनकी बलिदान स्मृति यात्रा भाजपा जबलपुर संसदीय क्षेत्र एवँ साँसद श्री राकेश सिंह के तत्वाधान में गांधी भवन से बलिदान स्थली तक निकाली गई।

उल्लेखनीय है कि जबलपुर के गोंडवाना साम्राज्य के राजा शंकरशाह एवँ उनके पुत्र कुँवर रघुनाथशाह देश के पहले राजा थे जिन्हें अंग्रेजो ने तोप के मुंह में बांधकर उड़ा दिया था और उनके इस बलिदान गाथा एवँ जबलपुर के गौरव को जन जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से उनके बलिदान के बाद पहली बार इस तरह का जीवंत दृश्यांकन करने का कार्य किसी राजनैतिक दल और राजनैतिक व्यक्ति के द्वारा किया गया।

बलिदानी राजा शंकरशाह एवँ कुँवर रघुनाथशाह की बलिदान स्मृति यात्रा गांधी भवन से प्रारंभ हुई जिसमें सबसे आगे उनकी गिरफ्तारी का जीवंत दृश्यांकन का अभिनय करते हुए राजा शंकरशाह, कुँवर रघुनाथ शाह उनकी धर्मपत्नीयां रानी फुलकुँवर एवँ मन कुँवर को अंग्रेज सैनिक तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर ई क्लार्क के नेतृत्व में गिरफ्तार करके ले जाते हुए चल रहे थे।

यात्रा मार्ग में राजा शंकरशाह रघुनाथशाह के सहयोगी रहे बलिदानी क्रांतिकारियो की भेषभूषा में 15 अलग अलग मंचो से राजा शंकरशाह रघुनाथ शाह पर पुष्पवर्षा की गई, जिनमे महारथी सूबेदार बलदेव तिवारी, दसनामी महान्तपुरी बाबा, मंहत संग्राम गिरी, शहीद गंगापुरी गोसाईं, राजा हृदय शाह, महारथी मेहरबान सिंह, श्रीयुत जवाहर सिंह, गजराज सिंह, श्रीयुत रामनिवास चौबे, श्रीयुत देवी सिंह, श्रीयुत सुदीन दास, कूड़न सिंह, सरजू प्रसाद ठाकुर, महारथी मोनी सिंह प्रमुख थे।
बलिदान यात्रा में जिन जिन कलाकारों ने जीवंत दृश्यांकन किया उनके आवभाव से कल्पना की जा सकती थी कि 164 वर्ष पूर्व किस तरह से हमारे बलिदानियो को गिरफ्तार किया गया होगा।

भी स्वागत मंचो से राजा शंकरशाह रघुनाथ शाह पर पुष्प वर्षा कर रहे थे। यात्रा गांधी भवन, घंटाघर, हाईकोर्ट चौक होते हुए बलिदान स्थली पहुँची जहां साँसद श्री राकेश सिंह के साथ सभी जनप्रतिनिधियों एवँ पार्टीजनों ने राजा शंकरशाह रघुनाथ शाह के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।

साँसद श्री राकेश सिंह ने इस अवसर पर कहा हम सौभाग्यशाली है कि हमारे जबलपुर में देश के आदिवासी जननायक राजा शंकरशाह रघुनाथ शाह ने 1857 की क्रांति में अंग्रेजो से लोहा लिया और अपनी भूमि की रक्षा के लिए समझौता न करते हुए अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया।

साँसद श्री सिंह ने कहा देश के स्वतंत्रता संग्राम में अनेकों क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया है किन्तु देश का पहला राजवाड़ा गोंडवाना साम्राज्य रहा जिनके राजा और उनके पुत्र को तोप के मुंह बांधकर उड़ाया गया है। उनके बलिदान की गाथा को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए उनके गिरफ्तारी वाले दिन 14 सितम्बर को ही यह बलिदान स्मृति यात्रा संसदीय क्षेत्र जबलपुर के तत्वाधान में निकाली गई है।

साँसद श्री सिंह ने कहा आज़ादी के 75 वें वर्ष में अमृत महोत्सव के आलोक में देश मे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर देश में अनेकों कार्यक्रम आयोजित हो रहे है और प्रधानमंत्री जी की सोच के अनुरूप ऐसे बलिदानियो जिन्होंने हमारे देश की आज़ादी में अपने प्राणों को न्यौछावर किया है उनकी बलिदान गाथा को लोगो तक पहुँचाने हेतु ही यह आयोजन किया गया है जो लगातार 5 दिनों तक चलेगा।

इस अवसर पर नगर अध्यक्ष जीएस ठाकुर, ग्रामीण अध्यक्ष रानू तिवारी, प्रदेश उपाध्यक्ष सुमित्रा वाल्मीकि, प्रदेश मंत्री आशीष दुबे, कोषाध्यक्ष अखिलेश जैन, विधायक अशोक रोहाणी, सुशील तिवारी, पूर्व विधायक अंचल सोनकर, शरद जैन, हरेंद्रजीत सिंह बब्बू, पूर्व महापौर प्रभात साहू, सदानंद गोडबोले, स्वाति गोडबोले, डॉ जितेंद्र जामदार, एसके मुद्दीन, प्रशांत तिवारी गोलू, शिवम तिवारी, रोजीना कुरैशी के साथ जिला पदाधिकारी एवँ बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे।