आगामी त्यौहारों में मूर्ति निर्माण के लिए दिशा-निर्देश जारी जिला मजिस्ट्रेट ने जारी किए आदेश

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शारदा श्रीवास ब्यूरो मंडला 

मंडला -कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट हर्षिका सिंह ने क्षेत्रीय अधिकारी म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, विजय नगर, जबलपुर से प्राप्त प्रतिवेदन 31 अगस्त 2021 के अनुक्रम में गणेश जी, दुर्गाजी की मूर्तियाँ स्थापित कर पूजा की जाती है एवं पूजा के उपरांत मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है। मूर्तियों का विसर्जन प्राकृतिक जल स्त्रोतों में किये जाने से जल की गुणवत्ता प्रभावित होती है एवं जलीय जीवन पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। मूर्ति विसर्जन से प्राकृतिक जल स्त्रोतों जैसे नदी, तालाब, झील आदि की गुणवत्ता प्रभावित न हो इसके लिये केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नई दिल्ली द्वारा मूर्ति विसर्जन के संबंध में गाईड लाइन जारी की गयी है तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण, सेन्ट्रल जोनल बैंच भोपाल 19 दिसम्बर 2013 जारी गाईड लाईन में मूर्ति निर्माण एवं मूर्तियों व ताजियों के विसर्जन हेतु निर्देश जारी किये गये है। उपरोक्त प्रतिवेदन के आधार पर मण्डला जिले में मूर्ति निर्माण एवं विसर्जन से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम हेतु प्रतिबंधात्मक कार्यवाही व प्रचार-प्रसार आवश्यक है।
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट हर्षिका सिंह ने दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के अंतर्गत आदेशित किया है कि मण्डला जिले की राजस्व सीमाओं के अंतर्गत मूर्तियों, प्रतिमाओं के निर्माण हेतु केवल प्राकृतिक सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाये। मूर्तियों के निर्माण में परम्परागत मिट्टी का ही उपयोग किया जाये, पकी हुई मिट्टी, पी.ओ.पी. (प्लास्टर ऑफ पेरिस) या किसी प्रकार के केमिकल एवं रासायनिक वस्तुओं का उपयोग मूर्ति निर्माण में किया जाना प्रतिबंधित रहेगा। मूर्तियों, प्रतिमाओं पर कलर हेतु केवल प्राकृतिक रंगों व गैर विशाक्त रंगों का इस्तेमाल किया जायेगा। किसी भी प्रकार के रासायनिक व विशाक्त रंगों का पूर्णतयाः इस्तेमाल प्रतिबंधित रहेगा।
जिले में केवल परम्परागत मिट्टी से निर्मित प्रतिमाओं का ही उत्पादन व विक्रय किया जा सकेगा। परम्परागत मिट्टी छोड़कर अन्य पदार्थ जैसे पी.ओ.पी. व अन्य रासायनिक पदाथों से बनायी जाने वाली प्रतिमाओं के उत्पादन तथा विक्रय, बाहर ले जाने या बाहर से लाने को प्रतिबंधित किया जाता है। परम्परागत मिट्टी छोड़कर अन्य पदार्थ जैसे पी.ओ.पी. व अन्य रासायनिक पदार्थों से मूर्ति, प्रतिमाओं के निर्माण को प्रतिबंधित किया जाता है। स्थानीय निकाय द्वारा इस संबंध में सत्यापन किया जायेगा, यदि परम्परागत मिट्टी छोड़कर अन्य पदार्थ जैसे पी.ओ.पी. व अन्य रासायनिक पदार्थों से प्रतिमाओं के निर्माण का मामला प्रकाश में आता है तो तत्काल स्थानीय निकाय द्वारा इस निर्मित प्रतिमाओं को अपने कब्जे में लेकर उनका निपटान ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन नियम-2016 के प्रावधानों के अनुरूप करेगा।
पूजन सामग्री जैसे फल-फूल, नारियल, वस्त्र-आभूषण, सजावट के सामान जिनमें कागज एवं प्लास्टिक से निर्मित वस्तुएं शामिल हैं, को मूर्ति, प्रतिमाओं विसर्जन के पूर्व निकालकर उन्हें अलग-अलग एकत्रित किया जायेगा तथा उक्त एकत्रित सामग्री का निपटान ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन नियम-2016 के प्रावधानों के परिप्रेक्ष्य में स्थानीय निकायों द्वारा किया जायेगा। मूर्ति, प्रतिमाओं के विसर्जन के 24 घंटे के भीतर विसर्जित मूर्ति, प्रतिमाओं से उत्पन्न ठोस अपशिष्ठ जैसे बांस, रस्सी, मिट्टी, पी.ओ.पी., प्रतिमा के हिस्सों आदि को एकत्रित कर उनका निपटान नगरीय ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन नियम-2016 के प्रावधानों के परिप्रेक्ष में स्थानीय निकायों द्वारा किया जायेगा। उक्त आदेश जारी दिनांक से 15 अक्टूबर 2021 तक प्रभावशील होगा तथा उक्त अवधि में उक्त आदेश का उल्लंघन धारा 188 भारतीय दण्ड विधान अंतर्गत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आयेगा।