मध्य प्रदेश सरकार अब राज्य में जुआ और लॉटरी चलाने की अनुमति दे सकेगी-साध्वी बोली मेरा समर्थन

Scn news india
मनोहर
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने लॉटरी और जुआ खेलने के लिए केन्द्रीय कानून के तहत मंजूरी देने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। मध्य प्रदेश सरकार अब राज्य में जुआ और लॉटरी चलाने की अनुमति दे सकेगी। इसके लिए सरकार की तरफ से 23 अगस्त को नोटिफिकेशन जारी किया गया है। यह नोटिफिकेशन केन्द्र सरकार के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2019 के तहत जारी किया गया है। इसके नए नियमों के अनुसार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी उत्पाद की ब्रिकी, उपयोग अथवा आपूर्ति या किसी व्यवसाय हित को बढ़ावा देने के लिए किए गए दो मामलों में राज्य सरकार अनुचित व्यापार व्यवहार के दायरे से छूट प्रदान कर सकेगी। इसमें पहला लॉटरी (विनियमन) अधिनियम, 1998 के अधीन अनुज्ञात लॉटरियां और दूसरा सार्वजनिक द्युत (जुआ) अधिनियम 1867, के अधीन गैर-निषिद्ध संयोग अथवा कौशल के खेलों, जो द्यूत क्रीडा नहीं है और जिनमें खेलों में सफलता कौशल की पर्याप्त मात्रा में निर्भर है, न कि संयोग (चांस) पर।
सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर
इसको लेकर पूछे सवाल पर सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने लॉटरी को वैधानिक करने पर अपना समर्थन दिया है। सांसद ने कहा कि सरकार की नीतियां है। जिससे समाज को लाभ हो। वो कार्य प्रारंभ कर रहे हैं। मैं सरकार के निर्णय के साथ हूं। लॉटरी से समाज को लाभ कैसे मिलने के सवाल पर सांसद ने कहा कि यहां लॉटरियां कई प्रकार की चलती हैं। केवल नाम उसका लॉटरी दे दिया गया है। जिसमें समाज काे लाभ हो। लोग धनोपार्जन कर सके। समाज का अच्छे से जीवन यापन कर सके। जिसमें समाज की सेवा हो सके। ऐसा कार्य हमेशा करना चाहिए। सांसद के इस बयान पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है।
कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने सोशल मीडिया पर लिखा- संघ प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा निर्मित तकनीकी कारणों से बरी, लेकिन मालेगांव ब्लास्ट में आज भी आरोपित भगवाधारी सांसद प्रज्ञा सिंह सट्‌टे- जुए को सामाजिक और धर्नोपाजन की कारक बता कर वकालत कर रही हैं! वेश्यावृत्ति भी वैध करा दीजिए, राजस्व मिलेगा!
सांसद के बयान पर कांग्रेस के प्रदेश मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने कहा कि शिवराज सरकार के लाटरी को वैधानिक करने के निर्णय को सांसद समाज के लिए लाभकारी बता रही है। कह रही है वो इस निर्णय के साथ है। उन्होंने कहा कि ये कैसे जनप्रतिनिधि? ये क्या कह रही है इनको भी नहीं पता?