बैंकर्स जमा राशि अनुपात में ऋण प्रकरण स्वीकृत करें – कलेक्टर

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कामता तिवारी
संभागीय ब्यूरो रीवा
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  • बैंकर्स जमा राशि अनुपात में ऋण प्रकरण स्वीकृत करें – कलेक्टर
  • हितग्राही मूलक योजनाओं के प्रकरण प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृत करें
  • जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक संपन्न

रीवा – जिला स्तरीय सलाहकार समिति (डीएलसीसी) के बैठक की अध्यक्षता करते हुए कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने बैंकर्स को निर्देश दिये कि वे जमा राशि के अनुपात में ऋण राशि स्वीकृत करें। समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने असंतोष व्यक्त किया कि जमा राशि के अनुपात में बैंकर्स ने बहुत कम ऋण प्रकरण स्वीकृत किये हैं। उन्होंने कहा कि 13771 करोड़ रूपये जमा के अनुपात में बैंकर्स ने केवल 4215 करोड़ रूपये का ही ऋण स्वीकृत किया है। जिसके कारण जिले का सीडी रेशियों केवल 30.61 है जबकि रिजर्व बैंक के मापदण्ड के अनुसार बैंकों का सीडी रेशियों 60 प्रतिशत से ऊपर होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी व्यक्त कि की कृषि सेक्टर में वार्षिक कार्ययोजना 570 करोड़ रूपये की थी जबकि कृषि सेक्टर में 3870 लाख रूपये का ये ऋण वितरित किया गया । इसी प्रकार एमएसएमई सेक्टर में वार्षिक कार्ययोजना 8141 लाख रूपये की थी जबकि उपलब्धि निरंक है। शिक्षा ऋण की वार्षिक कार्ययोजना 3492 लाख रूपये की तैयार की गयी थी जबकि बैंकों द्वारा केवल 145.99 लाख रूपये का ही शिक्षा ऋण वितरित किया गया। उन्होंने कहा कि बैंकर्स हितग्राही मूलक योजनाओं के ऋण प्रकरण तुरंत वितरित करें। उन्हें अनावश्यक रूप से अपने पास न रखें। कलेक्टर ने डीएलसीसी की बैठकों में पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूकों बैंक, बैंक ऑफ बडौदा, एक्सेस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक पंजाब एण्ड सिंध बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र एवं एचडीएफसी बैंक के प्रतिनिधियों के न आने पर कड़ी आपत्ति की और 15 सितंबर को अपरान्ह 5 बजे पुन: बैठक आयोजित करने के निर्देश दिये।
कलेक्टर इलैयाराजा टी ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अन्तर्गत 198 लक्ष्य के विरूद्ध अब तक केवल 63 प्रकरण स्वीकृत करने तथा 23 प्रकरण वितरित करने पर निर्देश दिये बैंकर्स प्राथमिकता के आधार पर प्रेषित प्रकरणों को स्वीकृत एवं वितरित करें। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के अन्तर्गत बैंकों द्वारा 9056 प्रकरणों के विरूद्ध 3130 प्रकरण स्वीकृत करने तथा 6752 प्रकरण ही वितरित करने पर असंतोष व्यक्त किया और कहा कि बैंकर्स का नैतिक दायित्व है कि वे भी गरीबों के लिए पॉजिटिव होकर काम करें और उनको स्वरोजगार स्थापित करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर ऋण वितरित करे। स्वसहायता समूहों को बैंक से रिवाल्विग फण्ड एवं क्रेडिट लिंकेज करने की समीक्षा के दौरान कहा कि स्वसहायता समूहों को 9165 लाख रूपये की सहायता दी जाना है। एनआरएलएम द्वारा 17746.86 लाख के प्रकरण बैंकों में प्रेषित किये गये। बैंक द्वारा केवल 777 स्वसहायता समूह को 4275.54 लाख के प्रकरण स्वीकृत किये गये हैं जबकि 864 समूहों को 1262.4 लाख रूपये वितरित किये गये।
उन्होंने कहा कि बैंकर्स अपने ऋण प्रकरण वसूली के लिए पत्र भेजे तहसीलदारों के माध्यम से आरआरसी द्वारा वसूली करवायी जायेगी। इससे बैंकों को अपना ऋण एनपीए में डालने से मुक्ति मिलेगी।
बैठक में नगर पालिक निगम के आयुक्त मृणाल मीणा, जिला पंचायत सीईओ स्वप्निल वानखेड़े, रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि सचिन सुले, अग्रणी जिला प्रबंधक अशोक मिश्रा, जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक यूबी तिवारी सहित समस्त बैंकर्स उपस्थित थे।