सादगी और सौहार्द्र के साथ मनाया गया पोला पर्व वृषभराज की हुई विशेष पूजा

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दिलीप पाल 

आमला. बोरदेही,मोरखा और खेड़ली बाजार सहित ग्रामीण अंचलों में पारम्परिक त्यौहार पोला पर्व सादगी और सौहार्द्र पूर्ण तरीके से मनाया गया। परम्परा के अनुसार क्षेत्र में सभी किसानों ने अपने वृषभो (बैलों) को सजाया तथा विधि-विधान से उनकी पूजा की। ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक पोला पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता रहा है विगत वर्ष से कोरोना महामारी के चलते पोला पर्व पर सार्वजनिक स्थलों पर भीड़ एकत्रित नहीं हो रही है तथा वृषभो द्वारा तोरण तोड़ने के कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया था। ग्रामीण क्षेत्रों में शासन के निर्देशों का पालन करते हुए पारंपरिक त्यौहार पोला पर्व को सादगी एवं कोरोना गाइडलाइन के अनुसार मनाया गया।पोला पर्व को देखते हुए पुलिस व्यवस्था भी दुरुस्त रही पुलिस के वाहन लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में दौरा करते रहें एवं पुलिस अधिकारी स्थिति का जायजा लेते रहे।

एक दिन पूर्व से होती है तैयारियां

ग्राम मोरखा के किशनसिंह रघुवंशी,डॉ रामकुमार पटेल, बम्हनी के योगेश रघुवंशी,बोरदेही के भग्गू पटेल, संजय सूर्यवंशी आदि ने बताया कि पारंपरिक पोला पर्व हमारे क्षेत्र में विशेष तौर पर पशुधन वृषभ (बैलों) की पूजा हेतु मनाया जाता रहा है।पोला पर्व के एक दिन पूर्व ही इस उत्सव की तैयारियां शुरू हो जाती है जिसमें सभी किसान अपने अपने पशुधन वृषभ को विधि विधान से तैयार कर पूजा अर्चना करते हैं।पोला पर्व पर सभी किसान अपने पशुधन को विशेष तौर पर सजाने का कार्य करते हैं इसके बाद पोला पर्व के दिन तोरण तोड़ने का कार्यक्रम होता है जिसके पश्चात सभी किसान अपने अपने पशुधन वृषभ को पूजन हेतु ग्राम भ्रमण कराते हैं।

वृषभराज का होता है श्रृंगार

ग्राम कुजबा के चंद्रभान वागद्रे खेड़ली बाजार के अतुल पारखे,उदयभान पारखे,कोहपानी के अजय पटेल,अंजय रामकुमार रघुवंशी,साहू बोरवेल बोरदेही के संचालक सतीष साहू आदि ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पोला पर्व को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।गत वर्ष कोरोना महामारी के चलते शासन के आदेशों का पालन करते हुए पारम्परिक त्यौहार पोला पर्व मनाया गया था,इस वर्ष भी शासन के निर्देशों के अनुसार ही हमारे ग्रामों में पोला पर्व सादगी एवं भाईचारे के साथ मनाया गया।जिसमें किसानों द्वारा अपने-अपने पशुधन वृषभ राज को रंग बिरंगे रंगों से सजाया। उनके श्रंगार हेतु विशेष सामग्री भी क्रय की जाती है आज पोला पर्व के दिन बैलों को विशेष तौर पर श्रृंगारित किया जाता है तथा सार्वजनिक स्थल पर तोरण तोड़ने का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है इसके पश्चात सभी लोग अपने अपने पशुधन की नियमानुसार पूजा अर्चना करते हैं।