दो वक्त की रोटी कमांने कर्तव्य दिखाते नो निहाल अपनी जान के साथ कर रहे खिलवाड़

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रविकान्त चतर्वेदी की रिपोर्ट

कहते हैं कि नौनिहालों का भविष्य गढने के लिए भारत देश में बाल श्रम पर रोक लगी हुई है और बाल श्रम करने वाले बच्चों को शिक्षा की ओर ले जाया जा रहा है सरकारों द्वारा अधिकारी नियुक्त कर बाल श्रम रोकने वा बाल श्रम करवाने वालों पर कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए मगर जमीनी स्तर पर आज भी नौनिहाल दो वक्त की रोटी कमाते देखे जा रहे हैं जो शासकीय योजना पर सवाल खड़े कर रहें हैं
देखी हमारी यह खास रिपोर्ट

 

 

देखिए इस तस्वीर को देखिए इस ढोल नगाड़े को देखिए इन लोहे के खम्बो जिनका वजन यह मासूम नौनिहाल उठा रहे हैं

देखिए इन नौनिहालों के चेहरों को जिनके होठों पर लाली और गाल गुलाबी जो मध्य प्रदेश के भविष्य पर कालीख बनकर दिखाई दे रही है जी हां यह तस्वीर मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की है

जहां देवेंद्र नगर में छोटे-छोटे नौनिहाल दो वक्त की रोटी कमाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं
लकड़ी के खंभों पर यह नौनिहाल चढ़कर पैदल चल रहे और दो वक्त की रोटी के लिए लोगों के सामने हाथ फैला रहे हैं

जिन बच्चों को स्कूल जाना चाहिए था स्कूल का बैग उठाकर अपने भविष्य को गढ़ना चाहिए था उस उम्र में यह बच्चे अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए ढोल नगाड़े एवं पाइपों का बोझ उठा रहे हैं।

8 से 10 साल की उम्र के बच्चे बताते हैं कि हम लोग खेल दिखाकर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं
क्योंकि सरकार से हमें किसी योजना का लाभ नहीं मिलता हमारी मम्मी है जिनका पैर टूट गया जिससे पापा मम्मी की देखरेख के लिए घर पर हैं और हम लोग रोटी कमाने के लिए निकले हैं जिसके लिए हमें जान से खिलवाड़ भी करना पड़ रहा।

इस तस्वीर को देखकर आप ही अंदाजा लगाइए की यह तस्वीर मध्य प्रदेश के उज्जवल भविष्य की और जा रही है या स्वर्ण मध्य प्रदेश को अंधकार की ओर खींच रही है।

इन बच्चों के नाम पर सरकार लाखों रुपए सालाना बजट से खर्च कर उड़ा रही है और बच्चों को भरण पोषण एवं शिक्षा देने का वादा कर रहे हैं मगर यह तस्बीर योजनाओं का हो रहे दुरुपयोग का उदाहरण बन रही है जहां छोटे छोटे नौनिहाल एवं बच्चे बीच सड़कों पर जान जोखिम में डालकर कर्तव्य दिखाते देखे जाते हैं और उससे जो आए होती है उससे अपना भरण-पोषण कर रहे हैं।