भ्रष्टाचार के चक्कर में पेड़ ही निगल गए जिम्मेदार, मजदूरों के नाम से निकाल लेते है राशि

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हटा से ऋषिराज तिवारी की रिपोर्ट

  • भ्रष्टाचार के चक्कर में पेड़ ही निगल गए जिम्मेदार
  • मजदूरों के नाम से निकाल लेते है राशि
  • मस्टर्ड डाल कर फर्जी मजदूर शो कर देते है

लगातार गहराते पर्यावरण संकट से निजात दिलाने को ले सरकार भले ही प्रयासरत रहे मनरेगा के तहत वृक्षारोपण की योजना के क्रियान्वयन को लेकर उदासीनता बरती जा रही है। योजना में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार के कारण केवल कागजों में ही पेड़ लगे हैं।
और भटकते मजदूर पलायन करने को मजबूर रहते. सिर्फ काग़ज़ों पर ही वृक्षारोपण हो जाता है ,

दमोह जिले की जनपद पंचायत हटा के बलेह का मामला है जहाँ मनरेगा के तहत 200 फलदार वृक्ष लगाए गए थे । एक पेड़ की लागत लाने से लेकर लगाने एवं देख-रेख तक कि लगभग 1094 रुपए बैठती है ,जिसमे 200 पेड़ लगाए जाना थे लेकिन वहाँ 50 पेड़ ही लगाए गए थे और स्टीमेट के अनुसार पेड़ की सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड, दवाई, पानी से लेकर देख- रेख तक के लिए सरकार पैसे देती है लेकिन जहाँ पौधे रोपें गए थे वहां पर ना तो ट्री गार्ड लगाए गए , ना ही पौधों पर दवाई डाली गई ना ही कोई देख-रेख के लिए कोई व्यक्ति रखा गया था जिससे कुछ पेड़ सूख गए और लगभग 150 पेड़ महज पोर्टल पर ऑनलाइन शो करा कर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिए गए जिसकी लागत लगभग 164100 रुपए है साथ ही 23 फर्जी मस्टर्ड डाल कर 1023 मजदूरों की लगभग 190020 राशि निकाल ली गई और मजदूरों को यह भी पता नही रहता कि हमारे नाम से राशि आती है और आती है तो कब निकल जाती है और साथ ही मटेरियल पेमेंट में कार्य के नाम मे एडवांस पेमेंट डाल कर मटेरियल के नाम पर 28930 रुपए का पेमेंट अधिकारियों की मिली भगत से कर दिया गया ,पर जब मीडिया को मनरेगा के तहत किये गए इस कार्य मे भ्रष्टाचारी की सूचना मिली तब टीम द्वारा जब सिद्ध बाबा हुसैना में जाकर जहाँ पेड़ लगाए गए थे वहां निरीक्षण किया गया,साथ ही ग्रामीणों ने बताया की यहाँ 50 पेड़ ही लगाए गए थे देख रेख ना होने से कुछ पेड़ सूख गए हैं।


अब सवाल यह पैदा होता है कि पोर्टल के अनुसार जब लगातार मजदूरों ने काम किया तो पेड़ गायब और सूख कैसे सकते है सम्भवतः वृक्षारोपण के नाम पर कुछ पेड़ लगाकर कर्मचारियों द्वारा शासन को चूना लगाकर पेड़ के नाम से पैसे निकाल लिए गए और पेड़ों की राशि निकालकर भ्रष्टाचारियों में राशि का बंदरबाट कर लिया गया, भ्रष्टाचार के चल रहे इस खेल की जानकारी तो सम्भवतः छोटे से लेकर बड़े अधिकारियों तक सब को होती है पर अपनी हिस्सेदारीयो के चलते सभी मुँह पर ताला लगाए रहते है अब देखते है इसमें अधिकारी वर्ग क्या जबाब देतें है एवं दोषियों पर क्या कार्यवाही की जाती है ?