सम्मान पत्र दिया लेकिन, नौकरी नहीं

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हटा से ऋषिराज तिवारी

हटा /- देश विदेश में कोरोना संक्रमण के कारण आर्थिक व्यवस्था के साथ-साथ बेरोजगारी भी चरम सीमा पर है देश में बेरोजगारी बड़ी समस्या बनी हुई है , कई जगह युवाओं का उपयोग करके छोड़ दिया जाता है, ऐसा ही मामला नगर हटा का सामने आ रहा है जहां कुछ युवाओं को कोरोना काल के दौरान सिविल अस्पताल हटा में ठेकेदारी पर रखा गया था जिन्होंने कोविड-19 बिना अपनी जान की परवाह किए सेवा भाव से सपोर्ट स्टाफ एवं गार्ड में सेवाएं दी लेकिन दो माह की सेवा के बाद कब उन्हें बाहर कर दिया गया यह उन्हें भी नहीं मालूम।

बेरोजगार युवाओं का आरोप है कि हम लोगों को बिना जानकारी बाहर कर दिया गया जबकि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान हम लोगों ने भी कोरोना योद्धाओं की तरह कार्य किया है। हम लोगों को पुनः सेवा में लिया जाए इसके लिए उन्होंने उच्चाधिकारियों तक कई बार ज्ञापन एवं शिकायतें की है लेकिन जब 75वे स्वतंत्रता दिवस पर इन्हें सम्मानित करने सिविल अस्पताल हटा बुलाया गया तो , तो इन्होंनें सम्मान पत्र नहीं बल्कि पुनः नौकरी की मांग सरकार से करते नजर आए ।

देखा गया है कि सिविल अस्पताल हटा में कुछ कर्मचारी ऐसे जमें हुए हैं जैसे अंगद का पैर वही, कोविड के दौरान वह दिखाई नहीं दिए जबकि जान की बाजी लगाने वाले कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर दिया गया जिस कारण से वह अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए असमर्थ दिखाई देते हैं। वही सोचने की बात है कि युवाओं के पास अनुभव होने के वावजूद भी रोजगार नहीं है । इन बेरोजगार का उपयोग आपदा में अपस्ताल प्रशासन ने जमकर किया है, लेकिन इन्हें सेवा समाप्ति का आदेश न तो ठेकेदार ने दिया और ना ही अपस्ताल के बड़े अधिकारियों ने ।