ग्रामीण क्षेत्रों से भी लाईव का ट्रायल रन सफल – डिजिटल मीडिया में बैतूल सबसे आगे

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राजेंद्र वंत्रप “संपादक” 

बैतूल – परिवर्तन ही सृष्टि का नियम है। फिर चाहे बन्दर से इंसान बनने की प्राचीन  किवदंती हो या वर्तमान की रॉकेट टेक्नोलॉजी साइंस , ये बात और है कि प्रवृति वश मनुष्य किसी भी बदलाव को सहजता से जल्द स्वीकार नहीं करता। लेकिन गाहेबगाहे उसे मान ही लेना पड़ता है कि यही उसकी नियति है और फिर वह उसे अपनाने को तैयार हो जाता है। समय समय ऐसे कई बदलाव कभी प्रकृति कराती है तो कभी मनुष्य।

भारत के संविधान में भी समय के अनुकूल कई संशोधन हुए कई नियमों को वर्तमान परिस्थिति के अनुसान जनहित में संशोधित करना पड़ा जिसे सहजता से एकमत से कभी स्वीकारा नहीं गया। लेकिन बाद में वो कानून बन गए।

ऐसा ही एक बड़ा परिवर्तन अब पत्रकारिता माध्यम में हो रहा है। इस बात को समझने की आवश्यकता है हमने कहा पत्रकारिता माध्यम। पत्रकारिता वही है जो PRB एक्ट में प्रावधान है इसमें कोई संशोधन नहीं हुआ। फिर वो पत्रकार चाहे  प्रिंट से हो इलेक्ट्रॉनिक से या डिजिटल माध्यम से हो। कानून सभी पर वही लागू होते है। लेकिन बदलाव केवल “माध्यम” में हुआ है।

ऐसे समझते है 

जिस तरह पहले आवागमन के संसाधनो में उपर्युक्त उपलब्धता नहीं होने से सन्देश एक स्थान से दूसरे स्थान तक सन्देशवादकों द्वारा भेजे जाते थे. जिन्हे ‘दूत’ भी कहा जाता था। लेकिन इसमें सन्देश पूर्णतः पारदर्शिता  से  पंहुचने  का सदैव संशय बना रहता था। अर्थ का अनर्थ होने की संभावना के चलते फिर पत्रों   द्वारा लिखित हस्ताक्षरित सन्देश भेजे जाने लगे। लेकिन इसमें भी संदेश दुरी के हिसाब से देरी से पंहुचता और जो कभी विवाद का कारण बन जाता। सन्देश मिलता इससे पहले दो राज्य आपस में भीड़ जाते।

फिर इस समस्या का समाधान कबूतर से निकला गया अब सन्देश जल्द तो पंहुचने लगे लेकिन यहाँ भी विडम्बना थी कई बार सन्देश मोहन की जगह सोहन को मिल जाता और फिर एक नया काण्ड शुरू हो जाता। जिसके कई उदाहरण इतिहास में है।

मतलब कहने का कि जैसे जैसे समय बदलता गया संदेशों को भेजने के माध्यम बदलते गए , फिर एक ही नगर में या स्थान पर संदेशो को सार्वजानिक करने मुनादी /डौंडी का चलन आया ,लेकिन उसी एक सन्देश को अन्यत्र या दूरगामी क्षेत्रों में एक साथ भेजने की चुनौती अब भी थी।

जिसका एक ही साधन था पत्र या पत्राचार। और यही सार्वजनिक सन्देश सम्प्रेक्षण  पत्राचार ने पत्रकारिता का रूप ले लिया। जिसके लिए प्रखर वाचाल, शतावधानी, बुद्धिजीवियों को यह दायित्व सौपा गया। ताकि राज्य के सन्देश या अन्य जनहित के समाचार एक साथ एक जैसे पत्र पर प्रकाशित (प्रिंट) कर एक ही सन्देश कई स्थानों पर एक साथ एक जैसे भेजे जा सके ।

समय बदलता गया सन्देश सम्प्रेक्षण माध्यम में गति लाने समय के अनुसार कई परिवर्तन होते गए। लेकिन सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब तकनिकी का मिश्रण माध्यम के रूप से पत्रकारिता में विकसित हो गया।  तकनिकी के पत्रकारिता में आने से चार चाँद लग गए। अब पलक झपकते सन्देश मूल स्वरुप में प्रक्षेपित होने लगे। और पत्रकारिता इलेक्ट्रॉनिक (टेलीविजन) माध्यम से प्रचलन में आ गई।

लेकिन मनुष्य की महत्वकांक्षाये कब कम होती है , “उससे भी ज्यादा” की ललक  शायद ही कभी ख़त्म हो। यही महत्वाकांक्षा ने डिजिटल माध्यम का रूप ले लिया। आज इंटरनेट की स्पीड ने समूची दुनियां को पल भर में  नापने की क्षमता देदी। व्हाट्सएप, फेसबुक, वेबसाइड ,मोबाईल एप , संदेशो के प्रसारण का माध्यम बन गए। तो फिर पत्रकारिता कैसे पीछे रहती। पत्रकारिता को तेज गति से चलने के लिए माध्यम चाहिए। और डिजिटल से तेज भला कुछ हो सकता है।

आज डिजिटल मीडिया का पूरी दुनियां पर कब्ज़ा है। और इसी कड़ी में एससीएन न्यूज ने 2009 से अपने प्रयास शुरू किये जब 2G टेक्नोलॉजी का हमारे देश में आगमन हुआ था।  समय के बदलाव से साथ हमने भी अपने माध्यम में वर्तमान परिस्थिती अनुसार परिवर्तन किया। अब जो किया है वह आने वाले समय में पत्रकारिता माध्यम में मील का पत्थर साबित होगा।

चैनल हेड हर्षिता वंत्रप ने बताया कि अब तक पत्रकार को पारिश्रमिक हेतु केवल विज्ञापनों पर निर्भर होना पड़ता था। जिससे लगातार प्रतिदिन 18 घंटे तक काम करने वाले फिल्ड के संवाददाता को सदैव आर्थिक तंगी से जूझना पड़ता था। एससीएन न्यूज इंडिया भारत सरकार द्वारा पंजीकृत मीडिया संस्थान ने अपने संवाददाताओं हेतु समाचारों के कवरेज पर भी आंशिक भुगतान की व्यवस्था लागू की है। जिससे संवाददाता को आर्थिक संबल मिल सके। जिसके लिए संस्थान ने एक सॉफ्टवेयर  निर्मित किया है। इस सॉफ्टवेयर  से ना केवल संवाददाता खबरें भेज पाएंगे। बल्कि इस पर मासिक कार्य एवं भुगतान सम्बन्धी ब्यौरा भी देख पाएंगे। साथ ही देश के किसी भी कोने से केवल एक क्लिक पर  अपने मोबाईल से ही  किसी भी समाचार , सभा ,आयोजन , या अन्य कार्यक्रम का सीधा प्रसारण  भी कर पाएंगे। ये प्रयोग देश का  डिजिटल मीडिया में पहला प्रयोग है। जो युवा संवाददाताओं को आर्थिक संबल प्रदान करने में सहायक होगा।  हमें गर्व है की ये प्रयोग आदिवासी अंचल बैतूल जिले से हमें करने का अवसर मिला है। जिसका सफल ट्रायल अनेक स्थानों के हमारे संवाददाताओं द्वारा किया गया है।