बड़े हर्ष के साथ मनाया गया भुजलिया

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भरत साहू 
धामनगाँव-गाँव के बुजुर्गों से मिली जानकारी से मालूम पड़ा कि बुजलिया एक बेटी का प्रतीक है यह आला ऊदल के समय की बात है जिस प्रकार से बेटी का जन्म एक परिवार में होता है और दूसरे घर मे उसका विवाह होता है इसी प्रकार से नागपंचमी को बुजलिया को बोया जाता है और राखी पर बहने झूला झुलती है फिर दूसरे दिन बुजलिया को नदी में गाजे बाजे के साथ मे विसर्जन किया जाता है रामप्रसाद बसन्तपुरे ने बताता की उनकी कई पीढ़ी से सभी गांव के लोग उनके घर जमा होते है और वहाँ पूजा करने के बात गांव के मंदिर में फिर नदी पर विसर्जित किया जाता है और उसमें से कुछ बुजलिया घर पर लाकर सभी नाते रिश्ते दार व ईस्ट मित्र के घर घर जाकर पेर पड़कर बुजलिया दी जाती है जिससे भाई चारा फैलता है और मन मुटाव मिट जाते है।