18 अगस्त 2021 दयोदय तीर्थ गौशाला

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रोहित नैय्यर ब्यूरो जबलपुर 

आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज ने कहा सुगंधी इत्र में भरी होती है, इत्र के गुण जो सुगंध के रूप में होते हैं उसे खरीदा तो जा सकता है लेकिन उसकी सुगंध को फैलने से नहीं रोका नही जा सकता, हजारों सूक्ष्म से सूक्ष्म कण सुगंध को चारों ओर फैला देते हैं , इसी तरह ज्ञान रूपी सुगंध चारों ओर फैलती है, केवलग्रही कहते हैं कि मैं तो ज्ञान फैला रहा हूं लेकिन ग्रहण करने वाले यदि ग्रहण नहीं करते तो ज्ञान बेकार है, हमें अपने आप को ग्राह करने वाले यंत्र के रूप में विकसित करना चाहिए ,ध्यान से सुनो उसे अपने अंतःकरण में उतारो।
आप लोग जो पूजा करते हैं पूजा की सुगंध उसी को आती है जिसने उसे ग्रहण किया है जिसने उसे ग्रहण किया ही नहीं तो पूजन सामग्री चढ़ाते जाइए कोई प्रभाव नहीं पड़ता ।
हम ज्ञान के स्वरूप को नहीं समझते यही कारण है कि हम उसके मूल तत्व को नहीं समझते जिस तरह खुशबू की चोरी नहीं की जा सकती, लेकिन खुशबू को सभी लोग ग्रहण करते हैं, हजारों लोगों की सभा में यदि एक कोने में हवा की दिशा में एक अगरबत्ती लगा दी जाए तो उसकी खुशबू चारों ओर फैलती है , यही स्थिति ज्ञान की है। आचार्य श्री कहते हैं कि ध्यान से ज्ञान की वृद्धि होती है, ध्यान अवश्य लगाना चाहिए ध्यान लगाते समय वातावरण साफ, स्वच्छ ,शीतल और अनुकूल होना चाहिए।
बाग बगीचे में झाड़ियों ,फूल -पौधों से शीतलता मिलती है , शीतल वायु चारो ओर बहती है इसलिए खुली जगह पर शांत चित्त से ध्यान लगाना चाहिए , ध्यान लगाते समय एक आसन में बैठकर समय, काल परिस्थिति सब भूल जाए तभी आपको समयसार के दर्शन होंगे। यह ध्यान करने वाले जानते हैं।
संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज* को नवधाभक्ति पूर्वक आज आहार दान का सौभाग्य

श्रीमति संध्या जी जैन श्री नितिन जी जैन- श्रीमति एकता जैन, श्री मोनूजी जैन – श्रीमति प्रिसीज्ञ जी जैन , ( १०५ छुल्लक श्री तत्वार्थ सागर जी ग्रहस्थ जीवन का परिवार) एंव श्री ऋषि जी जैन- श्रीमति राखी जी जैन (हम लोग परिवार नागपुर) एवं समस्त परिवार जबलपुर वालो को प्राप्त हुआ ।