कोथलकुण्ड टोल प्लाजा पर तिरंगे के नियमो का नही हुआ सम्मान

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अल्केश साहू 

क्या तिरंगा झण्डा लगा पाईप उखाड़कर , आड़ा करके तिरंगा उतारना तिरंगे का अपमान नही

 

15 अगस्त 20121 को सम्पूर्ण भारत देश में 75वां स्वतंत्रता दिवस मनाया गया है। भारत देश की शान तिरंगा झंडा सविधान के नियमानुसार सम्पूर्ण भारत के शासकीय एवं अशासकीय संस्थाओ में फहराया गया।

एक मामला बैतुल जिले के बैतुल परतवाड़ा मुख्य मार्ग पर स्थित कोठलकुण्ड टोल प्लाजा का है।जिसका टोल प्लाजा उदित बैतुल परतवाड़ा पथवे पी वी टी लिमिटेड टोल प्लाजा के नाम से उपस्थित है जहां संस्था द्वारा 15 अगस्त को तिरंगा तो फहराया गया पूरे सम्मान के साथ , परन्तु पर क्या जब बात झण्डा पूरे सम्मान के साथ उतारने की आती है तो उस संस्था में एक अलग ही नजरा देखने मे आया जिसमे की तिरंगे झण्डे को उतारते समस्य संस्था के दो लोगो द्वारा तिरंगा लगा खंबा पहले उखाड़ा गया उसके बाद तिरंगा लगे झण्डे के खम्बे को आड़ा कर तिरंगा निकाला गया। जहा तक नियमो की बात हो तो नियमानुसार वह अनुचित एवं असम्माननिय है। जिला प्रशासन इसे किस नजरिया से देखता है यह तो उन पर निर्भर करता है।

 

प्रत्यक्षदर्शीयो का मानना है कि यह तिरंगे झण्डे का अपमान है। तिरंगे को सह सम्मान सहित उतारना चाहिए। ये कोई तरीका नही होता कि तिरंगा लगा खम्बा उखाड़ो और बादमे तिरंगे को निकाल कर रखो। यह तिरंगे का पूर्ण रूप से अपमान है इस कार्यवाही होना चाहिए
इनका कहना है –
मधुरेश प्रतापसिंह टोल प्लाजा मैनेजर से जब इस मामले पर बात की तो बड़े ही चतुराई से पल्ला झाड़ते हुवे बताया कि तिरंगे का सम्मान हमारे दिल मे है और हम दिल से सम्मान करते है। तिरंगे झण्डे को कैसा उतारते है हमको इसकी कोई जानकारी नही। जैसा लगा उतार लिया। पर फहराया तो है न।

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