आचार्य श्री गुरुवर विद्यासागर महाराज ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बोलते हुए कहा

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रोहित नैय्यर 

15 कर्मभूमि का क्षेत्र है भारतवर्ष, हम इस महान कर्मभूमि में बैठे हैं, इसी भारत भूमि में हमारे तीर्थंकरों ने विहार किया है , ऐसी पवित्र भूमि भारत क्षेत्र में हमारा जन्म हुआ है इससे बढ़कर हमारा कौन सा पुण्य हो सकता है , भारत का नाम सर्वोच्च है और इसे ऊपर ले जाना है। आप भारत में रहकर विदेशों की बात करते लेकिन भारत में भाषा, संस्कृति और संस्कार है वह कहीं नहीं होते , यह धर्म- ध्यान करने का स्थल है तपोभूमि है, 15 अगस्त हमें याद दिलाता है कि हमें अपने से बढ़कर देश मानना चाहिए । प्रतिदिन भारत भूमि को तीन बार प्रणाम करना चाहिए मैं भी करता हूं । कल जो 28 क्षुल्लक दीक्षाएं हुई उनका परम सौभाग्य है कि उन्होंने भारत देश में जन्म लिया संयम व्रत का पालन किया तभी दीक्षा संस्कार हुआ। आचार्य श्री ने कहा कि अर्थ लाभ -धन और स्वयं से हटकर देश के बारे में सोचना चाहिए और प्रार्थना करना चाहिए कि भगवान ऐसे ही भारत कर्मभूमि में मेरा जन्म होता रहे और 1 दिन इसी पवित्र भूमि से हमें मुक्ति हो जाए, जब तक पूर्ण मुक्ति ना हो जाए जन्म भारत भूमि में लेने की भावना भारी चाहिए। हमारे भारत में ऐसी भाषा प्रकृति और संस्कृति है , सभी जीवो के साम्य भाव रखना चाहिए , किसी जीव से बैर ना हो सभी से मैत्री भाव हो, मैं कहता हूं कि बैर रखना चाहिए लेकिन पाप से बैर रखना चाहिए और पुण्य के साथ मैत्री भाव रखना चाहिए, तभी इस पावन भूमि भारत में कल्याण होगा

आहार का सौभाग्य अरविंद जैन अशोक जैन चावल वालों को प्राप्त हुआ।