बड़भूम में मुरूम चोरी के मामले में पर्दा डालने की तैयारी?

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हेमंत वर्मा 

➡️ डोंगरगांव विधायक की मौजूदगी में एसडीएम व खनिज विभाग को निर्देश के बावजूद कार्यवाही सिफर

राजनांदगांव। डोंगरगांव विधानसभा कबखुज्जी के समीपस्थ ग्राम बड़भूम के बड़े तालाब से रोड ठेकेदार द्वारा मुरूम के अवैध उत्खनन और परिवहन के मामले में क्षेत्रीय विधायक की मौजूदगी में एसडीएम और खनिज विभाग को कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं होने से आशंका व्यक्त की जा रही है कि पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी चल रही है।
उल्लेखनीय है कि डोंगरगांव विधानसभा अंतर्गत ग्राम खुज्जी से लगे बड़भूम के तालाब से रोड ठेकेदार द्वारा मुरूम के परिवहन की अनुमति लेकर विगत चार माह से उत्खनन और परिवहन को लेकर दैनिक दावा लगातार समाचार प्रकाशन कर प्रशासन एवं विभाग का ध्यान आकृष्ट कराते आ रहा है। इस मामले को लेकर विधायक दलेश्वर साहू ने सोमवार को मौके पर अधिकारियों को कड़ी कार्यवाही के निर्देश भी दिए थे, किंतु कार्यवाही का अब तक कोई पता नहीं चल सका है।
⏯️ दो हाइवा जप्त, चार हाइवा चालक वाहन सहित फरार
ज्ञात हो कि सोमवार को डोंगरगांव विधायक दलेश्वर साहू ने दैनिक दावा में लगातार छप रही खबरों को संज्ञान में लेकर डोंगरगांव जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित नायब तहसीलदार व पुलिस जवानों को मौके पर भेजकर मुरूम के उत्खनन और परिवहन में लगे वाहनों को रोककर जप्ती कार्यवाही करने कहा था। श्री साहू के निर्देश पर ही बड़भूम में मुरूम के परिवहन में लगे छह हाइवा और एक टू टेन (210) मशीन को रोककर पुलिस सहित अधिकारियों और नेताओं की मौजूदगी में जप्ती बनाई गई थी। हालांकि सूत्र बताते हैं कि सिर्फ दो हाइवा चालकों ने ही अपने वाहनों को डोंगरगांव थाने में लेजाकर खड़ा किया है और शेष चार हाइवा चालक मौका पाकर अपने-अपने वाहनों को लेकर फरार हो गए हैं, जिन्हें पुलिस दो दिन बाद भी पकड़ नहीं पाई है।
⏯️ परिवहन की अनुमति है तो वाहनों की जप्ती क्यों?
इस बारे में जिला खनिज अधिकारी राजेश माल्वे का कहना है कि ठेकेदार द्वारा शासन के सड़क निर्माण कार्य के लिए मुरूम के परिवहन के लिए अनुमति ली गई है, इसलिए बड़भूम में कुछ भी गलत नहीं हो रहा है। श्री माल्वे को इस बात से अवगत कराने पर कि छग खनिज अधिनियम में किसी को भी मुरूम के उत्खनन की अनुमति देने का प्रावधान नहीं है, बल्कि सिर्फ परिवहन की अनुमति दी जा सकती है, इस पर उन्होंने कहा कि मुरूम परिवहन की अनुमति के साथ उत्खनन का काम अंडरस्टूड रहता है। यानि परिवहन की अनुमति लेकर उत्खनन किया जा सकता है? श्री माल्वे की बातों पर गौर करें तो यह बात साफ समझ आती है कि किसी भी ठेकेदार को सिर्फ मुरूम के परिवहन की अनुमति देकर उत्खनन की छूट दे दी जाती है, जो स्वयं शासन के बनाए नियमों का खुला उल्लंघन है।
अब सवाल यह है कि क्या इन परिस्थितियों में विधायक द्वारा मुरूम परिवहन में लगे वाहनों को रूकवाकर जप्ती कराना नियम विरूद्ध था? क्या दो-दो बार विधायक रहने वाले केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त दलेश्वर साहू को खनिज एक्ट का ज्ञान नहीं है? विधायक को आखिर मंगलवार को मौके पर क्यों जाना पड़ा? विधायक ने बड़भूम के पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों से इस मामले में चर्चा कर मौजूद अधिकारियों को क्यों निर्देश दिए गए कि मुरूम की निकासी में लगे सभी वाहनों की जप्ती कर कड़ी कार्यवाही करें?
⏯️ खानापूर्ति कर मौके से लौट आए अधिकारी?
विधायक दलेश्वर साहू द्वारा मंगलवार को बड़भूम में ग्रामीणों के बीच मौजूद राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों को वाहनों की जप्ती और उत्खनन स्थल का सीमांकन करने के निर्देश के बाद आज बुधवार की शाम को एक चारपहिया वाहन में कुछ अधिकारी मौके पर जरूर पहुंचे, किंतु ग्राम के सरपंच, सचिव और ग्रामीणों को भी इसकी सूचना नहीं दी गई और तालाब में करीब दस मिनट तक भ्रमण करने के बाद बैरंग लौट आए। चारपहिया वाहन में मौके पर पहुंचे लोग आखिर कौन थे? इसका पता नहीं चल सका है। इस बारे में डोंगरगांव एसडीएम हितेश पिस्दा को उनके मोबाइल पर कई बार काल किया गया, किंतु उन्होंने काल रिसीव नहीं किया। जिला खनिज अधिकारी राजेश माल्वे ने स्पष्ट किया कि वे आज साल्हेवारा क्षेत्र के दौरे पर थे और खनिज विभाग का कोई भी कर्मचारी आज बड़भूम नहीं गया था। ऐसे में अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बड़भूम के तालाब में पहुंचने वाले अधिकारी आखिर कौन थे?
📞 वर्सन
बड़भूम जलाशय से मुरूम उत्खनन एवं परिवहन की अनुमति दी गई है। रोड निर्माण शासन का कार्य है, इसलिए कहीं कोई गलत नहीं हो रहा है।-राजेश माल्वे, जिला खनिज अधिकारी