सीतामढ़ी प्रथम आगमन पर आचार्य कौशलेंद्र कृष्ण शास्त्री एवं ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री का हुआ भव्य स्वागत

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सीतामढ़ी / भदोही

तीर्थराज प्रयाग एवं बाबा विश्वनाथ की नगरी बनारास के मध्य बसा कालीन नगरी के नाम से विख्यात जिला भदोही का सीतामढ़ी समाहित स्थल पौराणिक कथाओं में भी विशेष रूप से दरसाया गया है प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या के प्रकांड विद्वान भागवताचार्य कथावाचक आचार्य कौशलेंद्र कृष्ण शास्त्री एवं ज्योतिष सेवा केंद्र मुंबई महाराष्ट्र के संस्थापक ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री के सीतामढ़ी आगमन पर पत्रकार सुशील मिश्रा के द्वारा उनका भव्य स्वागत सत्कार किया गया पत्रकार सुशील मिश्रा ने बताया कि मेरे निजनिवास पर अयोध्या से चलकर भदोही जनपद प्रथम आगमन हेतु पधारे कौशलेंद्र कृष्ण शास्त्री एवं उनके अनुज भ्राता पंडित अतुल शास्त्री सहित पंडित जितेंद्र शास्त्री का सीतामढ़ी में पदार्पण मेरे लिये सौभाग्य की बात है श्रावण के पवित्र माष में किसी सन्त का समागम साक्षात ईश्वर की सेवा होती है।


पत्रकार सुशील मिश्रा ने संतों की सेवा से सरोकार होकर उन्हें सर्व प्रथम सीतामढ़ी गंगा स्नान,महर्षी बाल्मीकि आश्रम दर्शन , लकवकुश बाल विद्द्यालय भ्रमण एवं श्री रामचरित मानस पाठ में उल्लेखनीय धर्मस्थली माँ जानकी की तपोभूमि सीता समाहित स्थल सीतामढ़ी मंदिर सहित 108 फीट ऊंचे प्रतिमा के विराजमान महाबली हनुमान मंदिर का साक्षात दर्शन एवं पूजन कराया।

भदोही प्रथम आगमन के पश्चात अयोध्या से पहली बार धर्मस्थली सीतामढ़ी पधारे आचार्य कौशलेंद्र पाण्डेय ने बताया कि अबतक उन्होंने सिर्फ पुराणों और रामायण में इस अद्भुत स्थान का उल्लेख सुना था परंतु सुशील मिश्रा ने इस तपोभूमि का साक्षात्कार करवाकर हमें अभिभूत कर दिया सुशील मिश्रा द्वारा उनके निजनिवास पर जो आदर और सम्मान हमें प्राप्त हुआ है उसके लिए हम सभी आभारी हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री ने बताया कि भदोही आगमन का मुख्य उद्देश्य पत्रकार सुशील मिश्रा के निजनिवास पर विशेष उपस्थिति था कोरोना काल में सुशील मिश्रा की माताजी का असमय आकस्मिक निधन हो गया था उस समय मैं मुंबई में था और किसी कारण वश उनके उस दुःखद समय का सहभागी नहीं बन सका श्रावण के पवित्र माह में मेरा आगमन उत्तर प्रदेश में हुआ और यहाँ पहुँचते ही हमने सर्व प्रथम सीतामढ़ी के लिए प्रस्थान किया हमारी संवेदनायें सुशील जी एवं उनके परिवार के साथ हैं सीतामढ़ी आगमन के पश्चात इनके द्वारा प्राप्त स्नेह के हम सभी आभारी हैं ईश्वर मिश्रा परिवार को नित प्रतिदिन प्रगतिशील बनाएं।
सीतामढ़ी अपने निजनिवास पर पधारे आचार्यों एवं संतों को सुशील मिश्रा ने सीता समाहित स्थल की प्रतिमा माँ सीता जी की स्मृति चिन्ह एवं रामनामी देकर सम्मानित किया।