मो रफी की पुण्यतिथि पर सजी संगीत की महफ़िल

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दिलीप पाल 
आमला के गायक कलाकारों ने एक से बढ़कर एक शानदार नग्मे सुनाएसंगीत की दुनिया के अमर सितारे मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि पर बस स्टैंड आमला में गीत संगीत का शानदार कार्यक्रम हुआ।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर मदनलाल गुगनानी समाजसेवी एवं संगीतज्ञ उपस्थित थे।सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती और मोहम्मद रफी के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन किया गया।कार्यक्रम के प्रारंभ में कार्यक्रम के सूत्रधार नागेश बड़घरे ने कार्यक्रम की रूपरेखा रखी।संगीत के सुमधुर कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन मनोज विश्वकर्मा ने किया।कार्यक्रम में सबसे पहले सरस्वती वंदना आमला के उभरते गायक कलाकार संजय साकरे ने प्रस्तुत किया।

प्रसिद्ध कलाकार कैलाश सलाम ने रफी का प्रसिद्ध गीत दिल का सूना साज तराना ढूंढेगा प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया।बैतूल की प्रसिद्ध गायिका रंजना सोनी ने ड्यूट गीत चुरा लिया है तुमने गाकर मंत्र मुग्ध किया।वही आमला के उदीयमान गायक कलाकार मोनू चंदेल ने चलो रे डोली उठाओ कहार की शानदार प्रस्तुति दी।वही गायक कलाकार विकास चौकीकर ने तुम मुझे यूं भुला न पाओगे गीत पर खूब तालियां बटोरी।आमला के वरिष्ठ गायक कलाकार इंद्रपाल चौकसे ने एक से बढ़कर एक नग्मे सुनाए उनके द्वारा गाये गीत बड़ी दूर से आये है और बेखुदी में सनम गाकर लोगो का खूब मनोरंजन किया।वही आमला के प्रसिद्ध कलाकार हेमराज कहार ने दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर गाकर सब को झूमने पर मजबूर कर दिया।

वही कुदरत का करिश्मा प्रसिद्घ गायक सुखनंदन आहाके ने फीमेल सिंगर की आवाज में गाना गाकर सबको आश्चर्य चकित कर दिया इनके द्वारा लता जी और आशा जी द्वारा गाये प्रसिद्ध गीत मन क्यों बहका रे बहका की शानदार प्रस्तुति देकर श्रोताओं का मन मोह लिया और खूब तालियां बटोरी।वही पूरे कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण रहा आमला के उभरते हुए गायक कलाकार परवेज के द्वारा गाये गीत।परवेज ने रफी की आवाज में हूबहू प्रस्तुति दी।इनके द्वारा गाये गीत खिलौना जानकर तुम तो मेरा दिल तोड़ जाते हो पर सभी मंत्रमुग्ध हुए।कार्यक्रम में नए कलाकार मोनू चंदेल और परवेज तथा कैलाश सलाम,हेमराज कहार को सभी ने सराहा तो रंजना सोनी,इंद्रपाल चौकसे,विकास चौकीकर,संजय साकरे,सुखनंदन आहाके की प्रस्तुति ने झूमने पर मजबूर किया।कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा।कोरोना प्रोटोकाल का पूरा पूरा पालन करते हुए सीमित दर्शको की उपस्थिति में कार्यक्रम हुआ और इसे डिजिटल प्लेटफार्म पर भी प्रस्तुत किया गया।कार्यक्रम में रफी के एक से बढ़कर एक शानदार नगमों की बरसात हुई।कार्यक्रम को सफल बनाने में नागेश बड़घरे,मनोज विश्वकर्मा,किशोर यादव,अंकुश बड़घरे,शर्मा आदि का योगदान रहा।अंत मे आभार प्रदर्शन नागेश बड़घरे ने किया।