बेमौसम बारिश बिगाड़ा मौसम मिजाज, 18 दिसम्बर तक भारी ओलावृष्टि की चेतावनी

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बैतूल -अचानक बदले मौसम और मूसलाधार बारिश ने मौसम का मिजाज बिगाड़ दिया है तो वही किसानों के लिए भी बारिश आफत बन गई है। कुछ स्थानों पर ओले भी गिरने की खबर है।  बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को होने की आशंका है , और मंडियों में खुले में रखा आनाज भी भीग रहा है। सारनी में भी सुबह से घना कोहरा छाया रहा और 10 बजे तेज मूसलाधार बारिश शुरू हो गई जो लगातार 1 घंटे तक जारी रही। मौसम विभाग की माने तो अभी ऐसे मौसम बारिश कोहरे से निजात मिलती दिखाई नहीं दे रही। जिसे ले कर विभाग द्वारा अलर्ट जारी किया गया है।

18 दिसंबर से आसमान से फिर गिर सकते हैं बर्फ के गोले, मौसम विभाग का अलर्ट
दिल्ली-एनसीआर समेत समूचे उत्तर भारत   में मौसम का मिजाज अभी सुधरा नहीं है. पिछले दिनों पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती हवाओं के चलते उत्तर भारत के कई हिस्सों में तेज बारिश  और हवाओं के साथ ओले गिरे थे. हालांकि कुछ जगहों पर मौसम साफ होने लगा है, लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि अगले 2-3 दिनों में मौसम फिर करवट ले सकता है.

ओले की एक बरसात झेल चुके मध्य प्रदेश   के किसानों के लिए मौसम विभाग की ये सूचना परेशान कर सकती है. मौसम विभाग  ने कहा है कि 18 दिसंबर के बाद मध्य प्रदेश में एक बार फिर ओला गिरने का दौर आ सकता है. तब तक प्रदेश भर का तापमान गिरा रहेगा. लेकिन इस दौरान प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में घने कोहरे का असर बना रहेगा. मौसम विभाग ने कहा है कि एक सिस्टम तैयार हो रहा है, जिससे मध्य प्रदेश के आसमान पर बादल आ सकते हैं.

18 दिसंबर के आसपास पश्चिमी विक्षोभ की वजह से आने वाले ये बादल मध्य प्रदेश में ओले गिर सकते हैं. ओले गिरने और बरसात से ठण्ड तो बढ़ेगी ही, साथ ही खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान भी पहुच सकता है.

मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र नायक के मुताबिक, 18 दिसंबर तक तापमान में गिरावट आ सकती है. लेकिन इस दौरान ग्वालियर, चंबल, उज्जैन, भोपाल, रीवा, सागर संभागों में कोहरे का असर बना रह सकता है. फिलहाल ठण्ड के असर से मध्य प्रदेश के कई जिलों में तापमान में 13 डिग्री के नीचे पहुंच गया है. श्योपुर में तापमान 9 डिग्री तक पहुंच गया. भोपाल, इंदौर, ग्वालियर में तापमान 13 डिग्री के आसपास बना हुआ है. जबलपुर में न्यूनतम तापमान 17 डिग्री तक पहुंचा.
फसलों को नुकसान पहुचाएगा ओला

फिलहाल खेतों में फसलें खड़़ी हो रही हैं. इस दौरान फसल को हल्के पानी की ज़रूरत है. लेकिन ओला गिरा तो फसलों को नुकसान पहुंचेगा. ऐसे में किसान को दोहरा नुकसान उठाना पड़ेगा. पिछली फसल बाढ़ और ज्यादा बारिश से खराब हो गई थी, अब फसल बरबाद होने से नुकसान बढ़ जाएगा.

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