भाजपा मंडल गुनौर द्वारा प्रदेश सरकार के खिलाफ खेत धरना प्रदर्शन

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अमित त्रिपाठी गुनौर तहसील ब्यूरों 

गुनौर:- भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतत्व के निर्दशानुसार किसानों की कर्जमाफी, यूरिया का भारी संकट जैसी ज्वलंत समस्याओं व कमलनाथ सरकार की किसानों के साथ की गई वादा खिलाफी को लेकर 14 दिसंबर को दोपहर 12 से अपराह्न 3 बजे तक गुनौर मंडल के बरशोभा गांव में सहकारी दुकान के पास खेत धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। उक्त आयोजित कार्यक्रम में धरना प्रदर्शन मंडल गुनौर के प्रभारी पूर्व विधायक महेंद्र बागरी उपस्थित रहे!


भारतीय जनता पार्टी के धरना प्रदर्शन कार्यक्रम में सभी वरिष्ठ युवा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सरकार को उसकी किसान विरोधी और जनकल्याकारी योजनाओं को बंद करने पर पर जमकर कोसा वहीं मण्डल अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस सरकार अपने मद में चूर हो कर सभी किसान, गरीब, शोषित पीड़ित समाज को भूलकर अपने विधायकों की तिजोरी भरने का कार्य कर रही है ताकि अगली बार सत्ता ना मिलनेकर इनकी पीढ़ियां घर बैठे मौज उड़ाती रहें!
कांग्रेस की बहरी और गूंगी सरकार किसानों से वादा खिलाफी कर रही है उन्हें पर्याप्त मात्रा में यूरिया खाद उपलब्ध नहीं है हम इस दुख की घड़ी में किसान भाइयों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे और उन्हें उनका हक दिलाए जाने तक कांग्रेस सरकार को चैन से नहीं बैठने देंगे।


धरना प्रदर्शन के प्रभारी पूर्व विधायक महेंद्र सिंह बागरी ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि-
देश का एक ऐसा राज्य मध्य प्रदेश जिसको भारतीय जनता पार्टी की सरकार के समय लगातार कृषि कर्मण पुरस्कार मिलता रहा आज उस राज्य में किसानों की दुर्दशा है। एक के बाद एक लगातार किसानों के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है, उनसे झूठ बोला जा रहा है।
पहले कहा गया कि उनको 2 लाख तक का कर्ज माफ करेंगे जो नहीं किया, भीषण बारिश हुई सरकार ने आश्वासन दिया कि उनको पर्याप्त मुआवजा मिलेगा, मुआवजा तो दूर की बात सर्वे भी नहीं हुआ, केंद्र सरकार ने अपनी ओर से 1000 करोड रुपए की राशि भेजी 900 करोड रुपए पहले से आपदा प्रबंधन का कमलनाथ जी की सरकार के पास में था लेकिन किसान को ₹900 भी नहीं मिले। आज तक नहीं मालूम कि उस पैसे का मध्यप्रदेश की कांग्रेस की सरकार ने क्या किया।

उसके बाद जब उसको आवश्यकता थी यूरिया की वह यूरिया जिसको देश के प्रधानमंत्री मोदी जी ने नीम कोटेड करने के बाद पूरे देश से उसकी किल्लत समाप्त कर दी थी और जिससे उसकी ब्लैक मार्केटिंग बंद हुई, लेकिन मध्यप्रदेश सरकार के कुप्रबंधन के कारण आज किसान यूरिया के लिए लाठियां खा रहा है। 250 रु. की बोरी 400 – 500 रु. में मिल रही है। और उसके साथ साथ उसको डी.ए.पी खरीदने के लिए भी बाध्य किया जा रहा है जबकि उसकी आवश्यकता उसको नहीं है।


कालाबाजारी करने वाले व्यापारियों के हाथ में तंत्र चला गया है और मध्यप्रदेश में कमलनाथ जी की सरकार सो रही है 27 हजार मैट्रिक टन यूरिया पहले से सरकार के पास उपलब्ध था लेकिन उसके डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर कोई भी मैनेजमेंट, कोई प्लान नहीं किया। 15 टन यूरिया केंद्र सरकार ने इनको और भी देना तय कर लिया उसके अतिरिक्त 75हजार मेट्रिक टन जो इनका कोटा है उससे ज्यादा केंद्र की सरकार देने जा रही है, लेकिन दुर्भाग्य यह है के मध्यप्रदेश में तो प्रबंधन सरकार को ही करना है जो इस सरकार ने नहीं किया।

भारतीय जनता पार्टी इसको लेकर चुप नहीं बैठ सकती है, और हमने तय किया है खेत पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता, किसान और हमारे जनप्रतिनिधि धरने पर बैठेंगे और वहां बैठ कर मीडिया के माध्यम से प्रदेश और देश की जनता को यह बताने का प्रयास करेंगे कि खेतों की स्थिति क्या है और मध्यप्रदेश की सरकार के कुप्रबंधन के कारण आज किसानों को कितना कष्ट उठाना पड़ रहा है।
बड़ी मछली छोटी मछली को खाने लगी_वरिष्ठ गणमान्य नागरिक में बरशोभा के मोतीलाल चनपुरिया ने कहा कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री माननीय शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में समस्त किसानों के लिए जो सहकारी समितियों के बकाया दार थे उनके लिए समाधान योजना लागू कर ब्याज माफ किया गया था मूलधन के बिना ब्याज के 2 वर्ष में आधा-आधा जमा करने की योजना लागू की गई थी और किसानों द्वारा लगभग 75% किस्से जमा की गई या फिर राशि चना मसूर की फसल से काट ली गई किसानों की पूर्णता जमा राशि हो चुकी थी वही किसान रह गए थे जिन पर फर्जी कर्ज बंधा हुआ था इसी भी चुनाव आया कांग्रेश पार्टी द्वारा दो लाख तक किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया जो नहीं हुआ तो फिर किस तरीके से प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं कर्मचारियों को भी पता नहीं ना प्रमाणपत्र मिला और डिफाल्टर हो गए जिससे किसान खाद बीज भी नहीं खरीद पाया 31 मार्च 2018 पर बकाया कर्ज माफ होना था मार्च के बाद समाधान योजना में राशि जमा हुई किसानों को राशि आज तक नहीं लौटाई जा रही है सभी सहकारी समितियों मैं प्रशासक बैठे हैं ऐसा पता चला है कि समितियों से प्रस्ताव लेकर शासन से समझौता करा लिया गया है कि आधा कर्ज समितियां स्वयं माफ करें ऐसा हुआ तो समितियां पूर्ण हानि में चली जाएंगी क्योंकि बैंक समितियों पर कर्ज यथास्थिति में रहेगा
अतः अनुरोध है इस मंच के माध्यम से कि बैंक भी सहकारी समितियों पर बकाया कर्ज माफ करें नहीं तो यह हुआ कि बड़ी मछली छोटे को खा रही है

इनकी रही उपस्थिति
मंडल अध्यक्ष मलखान सिंह, रामसजीवन मिश्रा, उमा प्रसाद द्विवेदी, दशरथ प्रसाद उपाध्याय, मोतीलाल चनपुरिया, पंकज दुबे सुंगरहा, रनमत नकीब, महेंद्र पाल सिंह, चंदन सपेरा, राम नारायण दहायत , सुशील परोहा, राकेश त्रिपाठी झुमटा, मनीष चनपुरिया, धर्मेंद्र अवधिया, एडवोकेट राजेन्द्र जैन, प्रहलाद उपाध्याय, सतेंद्र द्विवेदी, संदीप पाल, मातादीन पटेल बाबाजी, राजेन्द्र सोनी, रामनिवास सोनी, भरत सिंह कोहनी, डी पी पांडे, कामता प्रसाद चनपुरिया, राम स्वरूप बिलोंहा, जयपाल सिंह राजपूत जमुनिया, शैलेन्द्र सिंह राजपूत, बड़े मुन्ना पथरहा, दुर्गा प्रसाद उपाध्याय, कंधी कुशवाहा, फुलारे चौधरी, नवला प्रजापति, वरिष्ठ नेता भूरे बड़गैयां, संतोष सिंह बुंदेला, हरी तिवारी, रज्जन तिवारी डोभा, बड़े पांडे, बीरेंद्र तिवारी सहित क्षेत्रीय किसानों के साथ भाजपा , जिला, सभी मोर्चा, मंडल पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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