वनांचल छेत्रों में नहीं है मूलभूत सुविधा ,विकास को तरसते ग्रामवासी

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शारदा श्रीवास

मंडला जिले के आज भी कुछ गाँव ऐसे है जहां निवास करने वाले ग्रामीण सुविधाओं से वंचित है वोट की राजनीति करने वाले नेता चुनाव के वक्त भोले-भाले आदिवासियों को विकास का लालीपॉप दिखाकर स्वंय का काम निकाल लेते हैं फिर कभी मुढ़कर नहीं देखते, ऐंसा ही कुछ देखने को मिला विकासखंड घुघरी के ग्राम साजपानी में जंहा मरीज हो या जननी को पथरीलें रास्ते से खाट पर ले जाते है ईलाज को, ग्राम पंचायत बिलगांव के ग्रामवासी योजनाओं से हैं वंचित
मंडला। आजादी के सात दशक बाद भी जिले के वनांचल और ग्रामीण क्षेत्र के लोग मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे है। जिले की कुल जनसंख्या करीब 11 लाख के पास है। जिसमें 486 ग्राम पंचायत है। वहीं 5 नगरीय निकाय क्षेत्र है। आजादी के बाद जिले का विकास तो हुआ है लेकिन ग्रामीण अंचल के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। जिले के वनांचल और ग्रामीण क्षेत्र में आज भी आवागमन, बिजली, पेयजल एवं संचार सुविधा सहित अनेक समस्याएं बनी हुई है। वनग्रामों के ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे है। वनांचल क्षेत्रों में योजना का क्रियान्वयन सिर्फ कागजों में ही हो रहा है। आजादी के सही मायने तभी होंगे, जब प्रत्येक नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होगी।
जानकारी अनुसार जिले में विकास के दावों की पोल खोलती यह तस्वीर विकासखंड घुघरी के पिछड़े और वनांचल क्षेत्र की है। आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी ग्राम पंचायत बिलगांव का वनग्राम साजपानी और उसके एक टोला के लोग मूलभूत समेत अन्य सुविधाओं से वंचित है। 689 की जनसंख्या वाले आदिवासी बाहुल्य वनग्राम में पहुंच मार्ग न होने से ग्रामीणों को आवाजाही में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर बारिश के सीजन में इस पगडंडी नुमा रास्त से पैदल चलना भी दूभर है। बारिश शुरू हो गई है और यहां के लोगों को पूरे बारिश के सीजन में वनवास में काटना पड़ेगा। इन गांव के लोग बारिश के सीजन में करीब 6 किमी पैदल चलकर मुख्य मार्ग गोपांगी तक आना पड़ता है। पगडंडी वाले रास्ते में कीचड़ ,छोटे-छोटे नाले से गुजरना पड़ता है।इस दौरान होने वाले हादसे को इंकार नहीं किया जा सकता ।