महान चित्रकार सैयद हैदर रज़ा की पुण्य तिथि पर कलाकारों और कला प्रेमियों ने हुए श्रद्धांजलि दी

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शारदा श्रीवास जिला ब्यूरो मंडला

मंडला -शुक्रवार को मंडला की माटी में आराम फरमा रहे पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित महान चित्रकार सैयद हैदर रज़ा की पुण्य तिथि पर कलाकारों और कला प्रेमियों ने हुए श्रद्धांजलि दी। स्थानीय कब्रिस्तान पर पहुंचकर उनके चाहने वालों ने रज़ा साहब व उनके पिता की कब्र पर चादर चढ़ाई और उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। हैदर रज़ा की यह पांचवी पुण्य तिथि थी। रज़ा साहब ने 23 जुलाई 2016 को नई दिल्ली में अंतिम सांस ली थी। उनकी इच्छा के मुताबिक मंडला स्थित कब्रिस्तान में 24 जुलाई 2016 को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनको सुपुर्द ए खाक किया गया था। तब से हर वर्ष रज़ा फाउंडेशन, रज़ा साहब के जन्म दिवस पर रज़ा उत्सव और उनकी पुण्य तिथि पर रज़ा स्मृति का आयोजन कर रहा है। इन कार्यक्रमों में हर आयु वर्ग के लोग बड़े उत्साह से शामिल होकर चित्रकारी करते है और रज़ा साहब को श्रद्धांजलि देते है। .

– रज़ा साहब को पुष्पांजलि देने कब्रिस्तान पहुंचे कला प्रेमी जयदत्त झा ने कहा कि जब से रज़ा साहब के इंतकाल के बाद से रजा फाउंडेशन द्वारा मंडला में साल में 2 बार चित्रकला कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों के जरिए हम रज़ा साहब को श्रद्धांजलि देते हैं और दूसरा स्थानीय कलाकारों और बच्चों को एक मंच मिल रहा है। रज़ा साहब को भारत सरकार ने पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया था, इतनी महान शख्सियत होने होने के बावजूद उनका मंडला से काफी लगाव रहा जिसकी वजह से ही उन्होंने इच्छा जताई थी कि उन्हें इन्तिकाल के बाद मंडला कब्रिस्तान में उनके पिता के बगल में दफन किया जाये। 60 साल विदेश में रहने के बाद भी मंडला से उनका रिश्ता बना रहा। रज़ा साहब मंडला की माटी में आराम फरमा रहे है, यह हमारे लिए फक्र की बात है। उन्होंने उन्होंने उम्मीद जताई कि फाउंडेशन लगातार इस तरह के कार्यक्रम करता रहेगा और मंडला की नई – नई प्रतिभाओं को सामने आने का अफसर मिलता रहेगा।


रज़ा स्मृति के संयोजक योगेंद्र त्रिपाठी ने कहां कि रज़ा साहब को हम यहां के कलाकारों को प्रोत्साहित कर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। मंडला में रज़ा फाउंडेशन द्वारा साल में विभिन्न आयोजन किए जा रहे हैं। रज़ा स्मृति के दौरान जो उत्साह दिखा उससे हमें काफी खुशी हुई। हम देख रहे हैं कि कई बच्चों ने चित्रकला लेकर काफी तरक्की की है। उनके चित्रों को देखकर लगता है कि इनमें समझ पैदा हो रही है और यह आगे जाकर बड़े कलाकार बन सकते हैं। बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए ही “रज़ा और रज़ा के चित्र” पुस्तक का विमोचन भी किया गया है। इसमें रज़ा साहब के चित्रों को बहुत अच्छी तरीके से समझाया गया है। लगातार हो रहे हैं इन कार्यक्रमों से मंडला के कलाकारों में भी एक अच्छा नजरिया पैदा हुआ है। फरवरी माह में साहब का 100वां जन्म दिवस है। यदि अनुकूल परिस्थिति रही तो हम भारतीय नृत्य और संगीत को वृहद सांस्कृतिक कार्यक्रम का यादगार आयोजन करेंगे।