शादी समारोह का दौर थमा, चार माह नहीं होंगे मांगलिक कार्य

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दिलीप पाल 

आमला. शादी विवाह समारोह का दौर मंगलवार से थम गया है। मंगलवार को देवशयनी एकादशी पर देवता चार माह के लिए सोने चले गए है। जिससे आगामी चार माह तक शादी विवाह सहित मांगलिक कार्य नहीं होंगे। विवाह के अगले शुभ मुहूर्त कार्तिक माह की देव उठनी एकादशी के बाद ही शुरू होंगे। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कारण अप्रैल व मई में मुहूर्त होने के बाद भी कई लोग शादी नहीं कर पाए थे । अनलॉक के दौरान ही शासन-प्रशासन ने शादी समारोह में सीमित संख्या के साथ वैवाहिक अनुमति दी थी। इस कारण कई लोगों ने कार्यक्रम ही कैंसिल कर दिए थे, जबकि कुछ लोगों ने सादगी पूर्वक तो कुछ ने प्रशासन के नियमों की अनदेखी करते हुए विवाह समारोह आयोजित किए थे। कोरोना होने पर देर रात तक शहर में शादियां होती रही। वहीं कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्हें अपने परिवार व रिश्तेदारों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जून-जुलाई के भी मुहूर्त रद्द कर नवंबर दिसंबर के मुहूर्त में शादियां करने की योजना बना ली है। पं. भूपेश पांडे ने बताया कि इस साल अब तक सर्वाधिक विवाह जुलाई माह में हुए है।
लग्न के लिए 16 जुलाई को अंतिम मुहूर्त था जबकि रविवार को भड़ली नवमी अबूझ मुहूर्त होने से दर्जनों विवाह सहित सभी मांगलिक कार्य बिना मुहूर्त देखे किए हुए। देवशयनी एकादशी के बाद धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकेंगे, लेकिन चार माह तक शादियां व मांगलिक कार्य नहीं होंगे। 20 जुलाई से देवशयनी एकादशी है और मान्यता है कि भगवान विष्णु चार माह वर्षाकाल में क्षीरसागर में शयन करने चले गए है।

विवाह के अगले शुभ मुहूर्त कार्तिक माह की देव उठनी एकादशी के बाद होंगे शुरू

सावन में होगी शिवजी की आराधना
देवशयनी एकादशी पर जगत के पालनहार के निंद्रा में होने पर सावन माह के दौरान शिवजी की आराधना होगी। सृष्टि संचालन का उनका प्रभार इस अवधि में भगवान भोलेनाथ के पास रहेगा । धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकेंगे, लेकिन विवाह समेत मांगलिक कार्य नहीं होंगे। पं. भूपेश पांडे के अनुसार 15 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन से फिर से विवाह आदि मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाएंगे जो 13 दिसंबर तक चलेंगे। 15 दिसंबर से धनु मलमास, खरमास होने की वजह से विवाह आदि शुभ कार्य 15 दिसंबर-2021 से 14 जनवरी-2022 तक नहीं होंगे। 15 जनवरी से 19 फरवरी तक विवाह मुहूर्त रहेंगे जबकि 23 फरवरी 2022 को गुरु पश्चिम में अस्त होंगे जो 24 मार्च 2022 तक अस्त रहेंगे। चले जाते हैं। इसलिए इस बार 20 जुलाई को देवशयनी एकादशी से 15 नवंबर तक की अवधि में क्षीर सागर में विश्राम अवस्था में रहेंगे।