आमला की खास खबर-कोरोना को मात देती आस्था.. गुरु पूर्णिमा तक होगी धनगौरी मंदिर में विशेष पूजा अर्चना

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दिलीप पाल 

आमला .बैतूल जिले और छिंदवाड़ा जिले की सीमा पर छिंदवाड़ा जिले में स्थित है श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र धनगौरी नागदेव मंदिर,जहां पर श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास जुड़ा हुआ है।धनगौरी नागदेव मंदिर से जुड़ी प्राचीन मान्यताओं के अनुसार यहां पर अक्षय तृतीया के बाद से ही विशेष पूजा अर्चना का दौर शुरू हो जाता है।विवाह के उपरांत नव दंपत्ति यहां पर अपनी मन्नत के अनुसार पूजा करने आते हैं इसके साथ ही किसान अपने पशुधन को लेकर भी पूजा-अर्चना करने यहां पहुंचते हैं।मान्यता यह है कि धन गौरी मंदिर में पूजा अर्चना करने के उपरांत नाग देवता की कृपा दृष्टि सभी पर बनी रहती है।अक्षय तृतीया के पश्चात महाराष्ट्र से भी पूजा करने भारी संख्या में श्रद्धालु नागदेव मंदिर पहुंचते हैं।मन्नतें पूरी होने पर धनगौरी नागदेव मंदिर में मन्नतें उतारने पूरी करने का भी विशेष महत्व है।इस दौरान यहां जगह जगह भंडारे प्रसादी का आयोजन भी किया जाता है।

श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र धनगौरी मंदिर

मध्य प्रदेश के साथ साथ आसपास के प्रदेशों के श्रद्धालुओं का भी वर्ष भर यहां आना जाना लगा रहता है।धनगौरी मंदिर में विशेष पूजा अर्चना करवाने का महत्व है जिसे लेकर मध्यप्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से भी भारी तादाद में श्रद्धालु यहां पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं। वर्तमान में कोरोना के चलते यहां मेले का आयोजन नहीं किया गया किंतु पूजा अर्चना करने हेतु लॉकडाउन अवधि को छोड़कर वर्षभर श्रद्धालु यहां आते रहे हैं। इसके अलावा नाग पंचमी, ऋषि पंचमी एवं महाशिवरात्रि पर्व पर भी काफी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में माथा टेकने पहुंचते हैं। धनगौरी नागदेव मंदिर से लोगों की विशेष आस्था जुड़ी है जिस कारण हजारों की संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं।

पशुधन को लेकर पहुंचते हैं किसान

ग्राम मोरखा के वरिष्ठ किशनसिंह रघुवंशी, ग्राम पटेल रामकुमार पटेल ने बताया कि प्राचीन मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया के बाद से ही धनगौरी नागदेव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का दौर प्रारंभ हो जाता है जो गुरु पूर्णिमा तक चलता है।क्षेत्र के समस्त किसानों द्वारा अपने अपने पशुधन को लेकर धन गौरी नागदेव मंदिर में पूजा अर्चना करने हेतु लेकर आते हैं। मान्यता है कि नाग देवता की क्षेत्रवासियों पर विशेष कृपा दृष्टि बनी रहती है जिससे वर्षभर फसल एवं पशुधन को कोई नुकसान नहीं होता। धनगौरी नागदेव मंदिर से क्षेत्रवासियों का विशेष लगाव है।क्षेत्रवासियों के लिए यह प्रथम आस्था का केंद्र है।

यहां नव दंपत्ति करते हैं अपनी मन्नत पूरी

मोरखा के सेवानिवृत्त शिक्षक कोमलसिंह सरोज एवं उपसरपंच मगनसिंह पटेल ने बताया कि अक्षय तृतीया से होने वाले विवाह के उपरांत नव दंपतियों नागदेव मंदिर आते है वे अपनी अपनी मन्नतें पूरी करने हेतु यहां विशेष पूजा अर्चना करते हैं।मध्यप्रदेश के साथ-साथ महाराष्ट्र से भी नव दंपत्ति यहां पूजा अर्चना करने के साथ अपनी मन्नतें पूरी करने आते हैं जिसके लिए उनके द्वारा यहां विशेष पूजा की जाती है।उन्होंने आगे बताया कि कोविड-19 के चलते इस वर्ष भी मेले का आयोजन नहीं किया गया,किंतु लॉकडाउन के अनलॉक होने के साथ-साथ श्रद्धालु नागदेव मंदिर पहुंच रहे हैं एवं अपनी मन्नतें पूरी कर रहे हैं।यह विशेष पूजा-अर्चना का दौर गुरु पूर्णिमा तक चलेगा जिसके बाद मान्यता अनुसार विशेष पूजा-अर्चना का दौर कुछ दिनों के लिए बंद हो जाता है जहां नाग पंचमी, ऋषि पंचमी एवं महाशिवरात्रि पर भी विशेष पूजा-अर्चना होती है।