मध्यप्रदेश में लगाया जाए राष्ट्रपति शासन -आदिवासी समाज

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आदिवासी नागरिकजनों की सुरक्षा नहीं कर पा रही प्रदेश की भाजपा सरकार

आदिवासी नागरिकों के विरुद्ध लगातार हो रही हिंसा की घटनाओं के विरोध में सौंपा ज्ञापन

मण्डला – प्रदेश में आदिवासी समाज के नागरिकों पर लगातार हो रहे हमले और हिंसा की घटनाओं को लेकर आदिवासी समाज में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इन घटनाओं के विरोध में प्रदेश में जगह जगह आंदोलन व प्रदर्शन तेज हो गए हैं। इसी क्रम में आज सोमवार को गोड़वान समाज के नागरिकों ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपकर प्रदेश में आदिवासियों की सुरक्षा व अधिकारों का संरक्षण करने की मांग की गई।
नेमावर की घटना के विरोध में जताया आक्रोश
देवास जिले के नेमावर में आदिवासी परिवार के 5 सदस्यों की नृशंश हत्या को लेकर आक्रोश जताया गया और पुलिस व कानून व्यवस्था की आदिवासी समाज के नागरिकजनों को लेकर लापरवाही को लेकर प्रदेश सरकार को दोषी ठहराया गया। इस घटना में पीड़ित परिवार के लोगों को पूरा न्याय दिलाने और सभी दोषियों पर कठोरतम कार्यवाही की मांग की गई।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि इन घटनाओं के अलावा प्रदेश में प्रतिदिन अनेक घटनाएं ऐसी घटित हो रही हैं जिनमें आदिवासी समाज के नागरिकजनों को निशाना बनाकर हिंसा की जा रही उत्पीड़ित किया जा रहा है। प्रदेश की सरकार आदिवासी समाज के नागरिकजनों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रही है। कानून व्यवस्था आदिवासियों के खिलाफ काम कर रही है। इसलिए राष्ट्रपति से मांग की गई है वे अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए प्रदेश में आदिवासी समाज के नागरिकजनों की सुरक्षा सुनिश्चित करवाते हुए हक़ व अधिकारों की रक्षा करवाई जाए।
और मध्यप्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए।