प्रसिद्ध शायर नैयर दमोही अब नही रहे , लेकिंन याद सदियों तलक किये जाएंगे

Scn news india

हर्षिता वंत्रप भोपाल

प्रसिद्ध  शायर नैयर दमोही अब नही रहे ।
अस्सी वर्ष की आयु में दुनियॉ को कह गए अलविदा ।

देश भर के कव्वाल पढ़ते है नैयर साहब का क़लाम ।
जनाज़े में कंधा देनें उमड़ा लोगों का हुजूम।

अच्छे इंसान की पहचान यही है नैयर । बाद मरने के उसे याद किया जाता है ।।

मेरी नज़रों से ओझल उनका जलवा हो नहीं सकता ।
किनारे से जुदा हो जाये दरिया हो नहीं सकता ।।

हर शक़्स सूँघता है मुझे फूल की तरह ।
कितना तेरे ख़्याल ने महका दिया मुझे ।।

हमसे वादा तो वफाओं का किया जाता है ।
वक़्त पड़ता है तो मुँह फेर लिया जाता है ।।

कुछ ऐसा नवाज़ा है हुजूर आपने मुझको ।
सब मेरे मुकद्दर की तरफ देख रहे है ।।

दमोहः ऐसी ही दिलकश ऊर्दू शेरो  शायरी की दुनियां के बेहतरीन शायर हाजी नैयर दमोही अब हमारे बीच नहीं रहे । उनका  हिर्दय गति रुक जाने से इंतक़ाल हो गया । वे काफी दिनों से बीमार चल रहे थे । उस्ताद शायर हाजी नैयर दमोही को दमोह में उनके गुरु पीरो  मुर्शिद ” ख़्वाजा
अब्दुलस्लाम चिश्ती साहब ” के आस्ताने के पास ही चिश्ती नगर में सुपुर्दे ख़ाक किया गया । नैयर दमोही का जन्म 1 जुलाई 1940 में हुआ था 80 वर्ष की उम्र में उनका इंतक़ाल हो गया ।

ख़ास बात ये रही कि शायर नैयर दमोही को उनके पीर की  मज़ार शरीफ़ के पास ही दफनाया गया है।क्योंकि नैयर साहब की शेरो शायरी से उनके पीर की मोहब्बत का इज़हार होता है जिस तरह से दिल्ली के  महान सूफ़ी संत हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के परम शिष्य हज़रत अमीर ख़ुशरो को जगह मिली और उनकी कब्र उनके पीरो मुर्शिद के करीब बनी, ठीक उसी तरह दमोह में महान सूफी संत हज़रत ख़्वाजा अब्दुलस्लाम साहब चिश्ती की शान में कलाम लिखने वाले प्रसिद्ध शायर नैयर दमोही को भी अपने पीरो मुर्शिद के ठीक बगल में सुपुर्दे ख़ाक किया गया। नैयर साहब ने 1982 में ऑल वर्ड नात कांफ्रेंस में पाकिस्तान में भारत का नेतृत्व किया था। नैयर साहब की 6 किताबें प्रकाशित हुई जिसमें प्रसिद्ध ग़ज़ल संग्रह “” शुआ – ए – नैयर  “” मध्यप्रदेश ऊर्दू अकादमी द्वारा प्रकाशित किया गया । इसके अलावा मध्यप्रदेश शासन के ऊर्दू अकादमी ने देश के प्रसिद्ध शायर”” निदा फ़ाज़ली सम्मान”” से भी सम्मानित किया गया था।

नैयर साहब के लिखे कलाम देश भर के क़व्वाल पढ़ते है जिसमे देश के बड़े दीनी जलसों में बड़े ही अदब और शौक़ से सुना जाता था ,नैयर सा के जाने के बाद पूरे प्रदेश के साहित्य जगत में ग़म का माहौल है । नैयर साहब के चाहने वालों में हर वर्ग के लोग है जो अपने इस लाड़ले शायर को खोने के बाद सभी ने कहा अब दुबारा नैयर दमोही जैसी शख्सियत  दुबारा आने वाली नही है जिसकी भरपाई करना मुश्किल है।
मध्यप्रदेश के छोटे से जिले दमोह से 1960 से अपनी शायरी की शुरुआत कर ना सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि देश विदेशों में भी अपने नाम के साथ साथ जिले का मान बढ़ाया ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

All rights reserved by "scn news india" copyright' -2007 -2019 - (Registerd-MP08D0011464/63122/2019/WEB)  Toll free No -07097298142
error: Content is protected !!