कलेक्टर पन्ना के आदेश की अवमानना, आदेश के बाद भी , BEO ने नहीं लिया प्रभार

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अमित त्रिपाठी गुनौर तहसील ब्यूरों 

शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गुनौर हमेशा से उपेक्षा का शिकार रहा है चाहे वह शिक्षण कार्य हो या फिर बच्चों की अन्य व्यवस्थाएं और उसका प्रमुख कारण है कि स्थाई रूप से संस्था में प्राचार्य का ना होना वर्षों से यह कुर्सी फुटबाल की तरह कभी इस शिक्षक के पाले में कभी उस शिक्षक के पाले में प्रभार के रूप में फुटबॉल की तरह लुढकती रहती है जिस कारण से विद्यालय में ना तो सही तरीके से पठन-पाठन होता है और ना ही सुचारू रूप से अन्य व्यवस्थाएं संचालित होती हैं जिस कारण से यह विद्यालय वर्षों से दुर्दशा का शिकार है वर्तमान में विद्यालय की कमान जिस शिक्षक को दी गई है उस पर कई बार भ्रष्टाचार के संगीन मामलों में निलंबित किया जा चुका है मालूम हो कि वर्तमान प्रभारी प्राचार्य को पूर्व में पैसे लेकर कक्षा नौवीं एवं ग्यारहवीं के छात्र-छात्राओं को पैसे लेकर पास कराने का आरोप लगा और जांच में सही भी पाया गया वहीं भोज के प्रभारी रहते हुए भोज के एडमिशन फार्म ₹400 -400 में बेचने का आरोप लगा था जो भोज प्रभारी रहते हुए छात्र-छात्राओं से व उनके अभिभावकों से वसूल किये गये थे वही 2011 में बोर्ड परीक्षाओं में नकल कराते हुए तत्कालीन कलेक्टर पन्ना केसी जैन ने रंगे हाथों पकड़ा था उन्होंने परीक्षा के दौरान बोरियों में गाइडें व कुंजी पकड़ी थी जिस पर तत्कालीन कलेक्टर ने एफ आई आर के निर्देश देते हुए केंद्र अध्यक्ष एवं सहायक केंद्र अध्यक्ष वर्तमान प्रभारी प्राचार्य को निलंबित किया गया था वहीं पर कई बार इनपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग चुके हैं पर जुगाड़ में माहिर महोदय हर बार जुगाड़ लगाकर के बच निकलने में सफल हो जाते हैं इस बार भी जुगाड़ में कामयाब बहाल होने के बाद उत्कृष्ट के प्रभारी प्राचार्य की कुर्सी हथियाने में सफल रहे प्रभारी जिनका अभी शिक्षा विभाग में संविलियन भी नहीं हुआ है तथा विद्यालय में इनसे कई और वरिष्ठ शिक्षक पदस्थ हैं बावजूद इसके उन्हें संस्था का प्रभारी प्राचार्य बनाया गया है जो लोगों की समझ से परे है।

प्रभारी प्राचार्य की मनमानी से परेशान छात्र व शिक्षक

छात्र-छात्राओं व अभिभावकों व शिक्षकों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक शिक्षकों पर रौब झाड़ना तथा महिला शिक्षकों से अभद्रता से पेश आना जिसकी शिकायत सीएम हेल्पलाइन में की जा चुकी है वहीं प्राप्त जानकारी अनुसार फिजूलखर्ची से संस्था की राशि का दुरुपयोग करना तथा मनमाने ढंग से अतिथि शिक्षकों की भर्ती पैसे लेकर बिना विज्ञापन निकाले करना तथा अनावश्यक रूप से शिक्षकों का अटैचमेंट करना शासन के टाइम टेबल के विरुद्ध अपना टाइम टेबल बनाना या यूं कहें कि प्रभारी प्राचार्य के सामने शासन प्रशासन कुछ नहीं जो साहब चाहे वही सही

1 पूर्व में इन पर यह आरोप
भोज प्रभारी रहते हुए भोज के एडमिशन फॉर्म 4 ₹400 में बेचने का आरोप लगा था जिस पर भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने एसपी पन्ना को 20 एक 2017 को जांच के आदेश दिए थे वह नियमानुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे
2 पैसे लेकर कक्षा नौवीं एवं 11वीं के छात्र छात्राओं की कापी में नंबर बढ़ाकर फेल छात्रों को पास कराने का भी इन पर आरोप लगा था
3 मंडल परीक्षा 2011 में सहायक केंद्र अध्यक्ष रहते हुए इन्हे यहां नकल कराते हुए तत्कालीन कलेक्टर केसी जैन द्वारा इन्हें रंगे हाथों पकड़ा था जिस पर 1 .3 .2011 को इन्हें निलंबित किया गया था
4 जिला पंचायत पन्ना के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पत्र क्रमांक 961 शिक्षा प्रकोष्ठ प्रकोष्ठ 2019 दिनांक 2 .2. 2019 को जारी आदेश में विद्यालय ना आना संस्था प्राचार्य के आदेशों की अवहेलना करना तथा छात्र-छात्राओं के पठन-पाठन में रुचि ना लेने के आरोप में इन्हें मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा निलंबित किया गया था

इतने गंभीर आरोपों के बावजूद गुनौर एक्सीलेंस की कमान ऐसे भ्रष्ट शिक्षक को कैसे सौंप दी गई इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है

राजनीति का अखाड़ा बना एक्सीलेंस गुनौर
जबसे महोदय ने प्रभारी प्राचार्य एक्सीलेंस की कमान संभाली है तब से एक्सीलेंस गुनौर राजनीति का अखाड़ा बना हुआ है प्रभारी प्राचार्य के मनमाने निर्देशों के चलते विद्यालय में पठन-पाठन लगभग ठप सा ही है हां एक बात जरूर है कि अब वह राजनीतिक अखाड़ा बन गया है यहां एक शिक्षक दूसरे शिक्षकों पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं और नौबत यहां तक आ जाती है कि तू-तू मैं-मैं की स्थिति बन जाती है जो अब विद्यालय के अंदर यह आम बात है

प्रमुख सीट पर बैठकर हरे पेन का करते हैं इस्तेमाल

प्रभारी प्राचार्य को प्रभार का जादू किस तरह सर चढ़कर बोल रहा है यह इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रभारी प्राचार्य रहते हुए यह प्राचार्य की सीट पर बैठते हैं तथा हरे पेन का इस्तेमाल करते हैं जबकि मालूम हो कि हरे पेन का इस्तेमाल राजपत्रित अधिकारी ही कर सकता है इनका तो अभी शिक्षा विभाग में संविलियन ही नहीं हुआ प्रभारी प्राचार्य होते हुए प्राचार्य की सीट पर बैठकर मनमाने तरीके के आदेश निर्देश विद्यालय के शिक्षकों व बच्चों को आए दिन देते हैं जिससे संस्था में पदस्थ शिक्षक छात्र-छात्रा परेशान

सबसे बड़ी बात यह है कि प्रभारी प्राचार्य गुनौर के यह सभी कारनामे किसी से छिपी नहीं है यहां तक कि जिला शिक्षा अधिकारी भी इनके द्वारा पूर्व में किए गए कारनामों तथा वर्तमान में किए जा रहे कार्यों से भलीभांति वाकिफ हैं तथा उन्हें यह भी मालूम है कि इनका शिक्षा विभाग में अभी संविलियन नहीं हुआ बावजूद इसके उन्हें उत्कृष्ट गुनौर का प्रभारी प्राचार्य बनाया गया तो चर्चा होना लाजमी है लोग तो यहां तक कहते हैं कि जिस व्यक्ति की सेवा समाप्त होनी चाहिए उसे विद्यालय का प्रभारी प्राचार्य यदि बनाया जाता है तो सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि पन्ना जिले की शिक्षा वव शिक्षा के सिपाहियों का स्तर क्या होगा भगवान ही मालिक है

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