रैगवां गांव के सिद्धबाबा आश्रम की गौमाताओं की हो रही उपेक्षा

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कामता तिवारी 

मैहर-गौमाताओं के संवर्धन के लिए सरकार भरसक प्रयास रत है, लाखों की लागत से गौशाला निर्माण करा कर गौमाताओं को हर साधन मुहैया करा रही है,मगर कुछ जिम्मेदारों की तानाशाही के चलते आज भी गौमाताओं का वंश खतरे में पड़ा हुआ है,जिसकी बानगी रैगवां गांव के सिद्धबाबा आश्रम में देखा जा सकता है, आपको बता दें कि रैगवां गांव के सिद्धबाबा आश्रम में एक संत रहते थे जो कि विगत कई वर्षों से गौमाताओं की सेवा देख रेख लालन-पालन करते थे, खुद अपने हाथों से गौशाला निर्माण किया, यहां तक कि पानी के लिए कुआं खुदवाया, भिक्षाटन करके मंदिर का निर्माण करना चाहा, मगर अफसोस छत नहीं डरवा पाये,और पिछले वर्ष चल बसे,इस बात का पूरा गांव गवाह है कि बाबा बिगत पचास वर्षों से सिद्ध बाबा आश्रम में रह कर भगवान की साधना करते हुए अपने दिन गुजारे, मगर अब बाबा के न रह जाने से गौमाताओं पर दाना पानी और सुरक्षा को लेकर संकट खड़ा हुआ है, गांव के ही कुछ लोगों ने उनके लिए दाना पानी छाया की ब्यवस्था करते हुए प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराना चाहा, मगर निराशा ही हाथ लगी, यदि ऐसा ही रहा तो रैगवां सिद्ध बाबा आश्रम की गौमाताओं का वंश कब तक सुरक्षित रहेगा ये तो देखने वाली बात होगी।