भारत के इतिहास में मुगलों-अंग्रेजों के साथ-साथ कांग्रेस के जुल्म भी याद रखे जाएंगे: रामेश्वर शर्मा

Scn news india

  • भारत के इतिहास में मुगलों-अंग्रेजों के साथ-साथ कांग्रेस के जुल्म भी याद रखे जाएंगे: रामेश्वर शर्मा
  • कहा – देष विरोधी कृत्य कांग्रेसियों को संस्कार में मिले हैं
  • आपातकाल की बरसी पर भाजपा की वर्चुअल बैठक, पूर्व प्रोटेम स्पीकर ने किया संबोधित

बैतूल । भारत के इतिहास में मुगलों द्वारा जनता पर किए गए दमन की घटनाएं दर्ज हैं। अंग्रेजों द्वारा दी गई प्रताड़ना दर्ज है। इसके अलावा जब-जब भी भारत के इतिहास की चर्चा होगी इसमें देष को आपातकाल की 21 महीने लंबी काली रात में झोंकने वाली कांग्रेस और इंदिरा गांधी के जुल्म भी याद किए जाएंगे। यह विचार पूर्व प्रोटेम स्पीकर, राजधानी की हुजूर विधानसभा से विधायक-भाजपा के ओजस्वी नेता रामेष्वर शर्मा ने शुक्रवार को अपरान्ह आपातकाल की बरसी पर भाजपा द्वारा आयोजित कार्यक्रम की वर्चुअल बैठक को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। इस दिवस को पार्टी ने काला दिवस के रूप में मनाया। बैतूल जिले में काला दिवस के कार्यक्रम की वर्चुअल बैठक को संबोधित कर रहे श्री शर्मा ने कहा कि जिस तरह से आजादी के पहले भारत माता की जय बोलने पर नागरिकों को अंग्रेजों की प्रताड़ना मिलती थी उसी प्रकार से आपातकाल के समय भारत माता के जयकारे लगाने वाले राजनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र आंदोलकारियों, पत्रकारों, साहित्यकारों को इंदिरा गांधी की सरकार ने मीसा एक्ट के तहत बिना किसी अपराध के जेलों में ठूंस दिया था। देष ने इंदिरा गांधी द्वारा थोपे गए आपातकाल की 21 महीनें लंबी काली रात भोगी है। इंदिरा गांधी के फैसले का विरोध करने वालों के खिलाफ देष भर में दमन चक्र चलाया गया। देष में सभी प्रकार के चुनाव स्थगित हो गए थे, नागरिक अधिकारों को समाप्त कर दिया गया था। इंदिरा गांधी के राजनीतिक विरोधियों को कैद कर लिया गया और प्रेस को प्रतिबंधित कर दिया गया था। इंदिरा गांधी और कांग्रेस के खिलाफ लिखने, बोलने और उठने वाली हर आवाज का दमन कर जेल में डाल दिया जाता था। यह सब इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए किया। कांग्रेस की शुरू से यही प्रवृत्ति रही है। कुर्सी के लिए देष को दांव पर लगाने में कांग्रेस ना पहले कभी हिचकी थी और ना ही आज हिचकती है। आज कांग्रेस के नेता राहुल गांधी देष को बदनाम करने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देते हैं। श्री शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जनसंघ सहित देष के अन्य राष्ट्रवादी संगठनों ने इंदिरा गांधी की दमनकारी नीति का विरोध किया था। इंदिरा की सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगा दिया था। संघ के लाखों स्वंयसेवक जेल में रहे, प्रताड़नाएं भोगी लेकिन इंदिरा की दमनकारी नीति के आगे झुके नहीं। इंदिरा नहीं जानती थी कि संघ की शाखाओं में संस्कार के ऐसे बीज बोए जाते हैं कि स्वयंसेवक देष के लिए मर मिटने को तैयार रहते हैं लेकिन दमन के आगे झुकते नहीं हैं। हम आज आपातकाल की बरसी पर कांग्रेस और इंदिरा गांधी की दमनकारी नीति को धिक्कारतंे हैं तो आपात काल के दौरान जुल्म सहने वाले लाखों लोकतंत्र सेनानियों को प्रणाम करते हैं जिनके संघर्ष और तपस्या के कारण देष को उस काले आपातकाल से 21 महीने बाद मुक्ति मिली थी। श्री शर्मा ने कांग्रेस के वर्तमान नेतृत्व को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह और अन्य कांग्रेसी जिस तरह से देष विरोधी बयान देते हैं, उसके संस्कार उन्हें उनकी दादी इंदिरा गांधी से मिले हैं। कांग्रेस नेता काष्मीर से धारा 370 हटाने पर सवाल उठाते हैं उन्हें इसके बजाए इंदिरा गांधी की आत्मा से सवाल पूछना चाहिए कि देष को आपातकाल की काली छाया मंे क्यों झोंका था ? लोकतंत्र को बंदी क्यों बनाया गया था ? इस वर्चुअल बैठक के आरंभ में भाजपा जिलाध्यक्ष आदित्य बबला शुक्ला ने बैठक की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि आपातकाल की बरसी पर प्रदेष नेतृत्व के आहवान पर आज पार्टी काला दिवस मना रही है। पूर्व सांसद हेमंत खंडेलवाल ने आभार प्रदर्षन करते हुए कहा कि यह दिन कांग्रेसी की दमनकारी नीतियों की याद दिलाता है तो लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष का स्मरण भी कराता है। बैठक का संचालन काला दिवस कार्यक्रम के प्रभारी रंजीत सिंह एवं बैठक की होस्टिंग अबिजर हुसैन ने की। बैठक में पूर्व सांसद हेमंत खंडेलवाल, विधायक डाॅ योगेष पंडाग्रे, भाजपा जिलाध्यक्ष आदित्य बबला शुक्ला, पूर्व विधायक अलकेष आर्य, मीसाबंदी रहे पूर्व सांसद सुभाष आहूजा, मोतीलाल कुषवाहा सहित पार्टी के 100 से अधिक वरिष्ठ नेता वर्चुअली शामिल हुए।