व्यवसायिक भवन निर्माण में एक नवम्बर से ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता नियम अनिवार्य

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मनोहर

भोपाल-नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री हरदीप सिंह डंग ने कहा कि तीव्र आर्थिक विकास, शहरीकरण और बढ़ती आबादी ने ऊर्जा आपूर्ति संसाधनों पर एक बड़ा दबाव डाला है। देश-प्रदेश में व्यवसायिक भवन, ऊर्जा के प्रमुख उपभोक्ता एवं ग्रीन हाऊस गैसों के सबसे बड़े उत्सर्जक बन रहे हैं। इसको देखते हुए राज्य शासन द्वारा भविष्य में निर्माण होने वाले व्यवसायिक भवनों में ऊर्जा दक्षता को प्रोत्साहित करने के लिए एक नवम्बर 2021 से ‘मध्यप्रदेश ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता नियम’ को अनिवार्य  किया जा रहा है।

नियम के लाभ

  • ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में कमी।

  • विद्युत भार एवं विद्युत खपत में कमी।

  • विद्युत उपकरणों के अनुकूलतम उपयोग से ऊर्जा का प्रभावी संरक्षण।

  • प्राकृतिक संसाधनों का बिल्डिंग डिजाइन और निर्माण में एकीकरण।

  • भवन उपभोक्ताओं के ‍लिये बेहतर आंतरिक वातावरण।

  • भवन के संचालन और रख-रखाव में आसानी होगी।

श्री डंग ने बताया कि मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम द्वारा प्रदेश की जलवायु, परिस्थितियों और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप वर्तमान ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (ECBC) और ईसीबीसी नियमों में संशोधन कर मध्यप्रदेश ऊर्जा संरक्षण भवन नियम संहिता (MP-ECBC) और मध्यप्रदेश ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता नियम (MP-ECBC Rules) बनाये गये हैं। केन्द्रीय ऊर्जा दक्षता ब्यूरो ने व्यवसायिक भवनों के लिये 2017 में ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता और वर्ष 2018 ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता नियम तैयार किये थे।एमपी-ईसीबीसी नियम के माध्यम से अनुपालन संबंधित विधि की जानकारी प्राप्त हो सकेगी। नियम में व्यवसायिक भवनों के लिये ऊर्जा प्रदर्शन मानकों को निर्धारित किया गया है। इनके अनुश्रवण से व्यवसायिक भवनों ऊर्जा संरक्षण वर्तमान भवन की तुलना में बेहतर हो सकता है।

व्यवसायिक भवन जैसे होटल, शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य संस्थान, शॉपिंग सेन्टर्स, वाणिज्यिक-व्यापारिक उपयोग भवन हवाई अड्डा, रेलवे-बस स्टेशन, मनोरंजन, सामाजिक, धार्मिक उद्देश्य के ऐसे भवन जहाँ बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं, दायरे में आयेंगे। यदि कोई आवेदक एक नवम्बर, 2021 के बाद व्यवसायिक भवन या ऐसे भवनों का निर्माण करना चाहता है, जिनका संयोजित विद्युत भार 100 किलोवाट या उससे अधिक होने की संभावना है या विद्युत मांग 120 केवीए या उससे अधिक होने की संभावना है तो आवेदक को कई बिन्दु सुनिश्चित करने होंगे।

यह बिन्दु होंगे सुनिश्चित

आवेदक को ऊर्जा लेखा परीक्षक-भवन को या मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम द्वारा नामित विशेषज्ञ की नियुक्ति, बिल्डिंग डिजाइन में मध्यप्रदेश ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता नियम का अनिवार्य रूप से पालन और ऊर्जा निष्पादन सूचकांक अनुपात एक या उससे कम सुनिश्चित करना होगा। आवेदक को ‘ऊर्जा लेखा परीक्षक-भवन’ द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित ‘एमपीईसीबीसी’ प्रमाण-पत्र प्राप्त कर बिल्डिंग प्लान एप्रुवल के समय एमपीईसीबी फार्म को संलग्न करना होगा। बिल्डिंग प्लान पर नगर निगम, नगर पालिका, ग्राम पंचायत या अन्य द्वारा अनुमोदन किये जाने पर ‘विशिष्ट भवन पहचान संकेत (युनिक बिल्डिंग आइडेंटिफिकेशन कोड)’ प्रति प्राप्त करनी होगी।

ऊर्जा लेखा परीक्षक करेंगे ऑडिट

निर्माण कार्य के समय ऊर्जा लेखा परीक्षक, भवन समय-समय पर निरीक्षण कर निर्माण कार्य मध्यप्रदेश ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता के अनुसार होना सुनिश्चित करेंगे। संहिता से विपरीत निर्माण कार्य होने पर मध्यप्रदेश ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता तकनीकी शिकायत निवारण समिति को उचित कार्यवाही हेतु सूचित किया जायेगा।

विशिष्ट भवन पहचान संकेत

निर्माण कार्य के बाद आवेदक को विद्युत विभाग से स्थायी विद्युत कनेक्शन प्राप्त करने के लिये आवेदन के साथ विशिष्ट भवन पहचान संकेत की प्रति संलग्न करना अनिवार्य होगी। विशिष्ट भवन पहचान संकेत की प्रति नहीं देने पर स्थायी विद्युत कनेक्शन नहीं मिलेगा। विशिष्ट भवन पहचान संकेत की प्रति अधिकारिता के प्राधिकारी जैसे – नगर निगम, नगर पालिक, ग्राम पंचायत व अन्य द्वारा अनुमोदन किये जाने पर ही उपलब्ध होगी।

आवेदक को भवन की ऊर्जा निष्पादन सूचकांक अनुपात को ‘एक’ या कम रखनी होगी। इसकी गणना इस प्रकार होगी। प्रस्तावित भवन ऊर्जा निष्पादन सूचकांक को मानक भवन के ऊर्जा निष्पादन सूचकांक से अनुपात कर मूल्यांकन करना होगा। सूचकांक वार्षिक ऊर्जा खपत किलो-वाट-घण्टे को बिल्ट-अप एरिया से अनुपात कर किया जा सकता है। प्रस्तावित भवन ऊर्जा निष्पादन का अनुपात मानक भवन ऊर्जा निष्पादन सूचकांक से कर आवेदक उसका मूल्यांकन एक या उससे कम सुनिश्चित करेगा। ऊर्जा निष्पादन सूचकांक अनुपात मॉनीटरिंग मयप्रदेश ऊर्जा विकास निगम द्वारा विद्युत विभाग की सहायता से की जायेगी। आवेदक द्वारा शिकायत होने पर ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता कार्यान्वयन समिति द्वारा निराकरण किया जायेगा। एमपीईसीबीसी नियम के अनुपालन से भवन बनाने वाले आर्किटेक्ट और इंजीनियर को भी कलात्मक और तकनीकी स्वतंत्रता मिल सकेगी।