देह छूटने से पहले ही दृष्टि छोड़ दो – ब्रह्मचारी रवीन्द्र जी आत्मन सिद्धायतन में चल रही ज्ञान गोष्ठी और विधान द्रोणागिरी की वंदना का लाभ भी लिया मुमुक्षुओं ने

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प्रद्युमन फौजदार
बडामलहरा/देह छूटने से पहले ही दृष्टि छोड़ दो उपर्युक्त उद्बोधन सिद्धायतन में आयोजित आध्यात्मिक ज्ञान गोष्ठी एवं पंचास्तिकाय मंडल विधान के अवसर पर बाल ब्रह्मचारी रवीन्द्र जी आत्मन ने अपने प्रवचनों में दिए। उन्होंने कहा कि जो अपनी प्रभुता को भूलकर पर से प्रभूता मानते हैं, वह पामर होते हैं,सच में तो वह भी नहीं होते सिर्फ पामर मानते हैं। ब्रह्मचारी आत्मन जी ने कण – कण की ईश्वरता और प्रभुता का कथन करते हुये कहा जो असमर्थ है उन्हें ही पर सहयोग की आवश्यकता होती है, जो राग है वह स्वयं का दोष है और राग का अभाव स्वयं की शक्ति से हुआ, इसमें पर का कुछ भी नहीं है। सिद्धायतन में ज्ञान गोष्ठी का लाभ ले रहे मुमुक्षुओं ने आज सामूहिक वन्दना का लाभ भी लिया।

सिद्धक्षेत्र द्रोणागिरी की वन्दना के दौरान दोपहर में ब्रह्मचारी रवीन्द्र जी आत्मन के मंगलकारी उद्बोधन का भी लाभ समागत सभा को प्राप्त हुआ जहां उन्होंने स्वाध्याय को सफल करने की प्रेरणा प्रदान की ।रात्रि काल में समन्तभद्र शिक्षण संस्थान के सिद्धार्थी छात्रों के द्वारा बहुत ही सुंदर महावीर वाणी कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। प्रात:कालीन जिनेन्द्र अभिषेक,पूजन एवं पंचास्तिकाय मंड़ल विधान जैन दर्शनाचार्य पं अभय कुमार जी देवलाली के निर्देशन में पं शुभम शास्त्री ज्ञानोदय भोपाल,पंकज जैन एवं नितिन जैन द्वारा विधिविधान पूर्वक सुमधुर स्वर लहरियों में सम्पन्न कराया गया।

 

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