प्रत्येक कार्य समय पर करें परंतु भेद विज्ञान हर समय करें- बाल ब्र. रवीन्द्र जी ,आत्मन

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प्रद्युमन फौजदार
बडामलहरा/प्रत्येक कार्य समय पर करें परंतु भेद विज्ञान हर समय करें।उपर्युक्त उद्बोधन सिध्दायतन में चल रहे आध्यात्मिक ज्ञान गोष्ठी एवं पंचास्तिकाय मंडल विधान के अवसर पर बाल ब्रह्मचारी रवीन्द्र जी आत्मन ने अपने प्रवचनों में दिए। उन्होंने अपने प्रवचनों में कहा कि जिनालय वीतरागता का दरबार है,अरे! जिनालय तो समवशरण है ।जीवन में दो तरह के व्यवहार मत बनाओ लौकिक व्यवहार अलग और अलौकिक व्यवहार अलग।

उन्होंने पहले के समय के लोगों की सोच और आधुनिक लोगों की सोच पर भी अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि लोगों का लौकिक व्यवहार ,लौकिक वचन भी आजकल बहुत विपरीत होते जा रहे है।उन्होंने समाज के विद्वानों के प्रति दृष्टिकोण पर भी अपने विचार रखे उन्होंने प्रेरणा देते हुए कहा – हम जिनालय में जो सीखते हैं उसे गृहस्थी में प्रयोग करते हैं। इस कार्यक्रम में आध्यात्मिक जगत के मूर्धन्य विद्वान पंडित अभय कुमार जी देवलाली, पंडित गुलाब चंद जी बीना आदि का भी समागम प्राप्त हो रहा है ।विधि विधान के कार्यक्रम शुभम् शास्त्री ज्ञानोदय भोपाल, पंकज जैन नितिन जैन सिद्धायतन के सहयोग से संपन्न कराए जा रहे है।इस अवसर पर जयपुर से पधारे महेन्द्र कुमार एवं उनकी धर्मपत्नी कुसुम गंगवाल ने सिद्धायतन के अध्यापकों,विद्वानों और छात्रों को उपहार भेंट किये।

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