12 डीजल-पेट्रोल पम्पों पर पीयूसी स्थापित नहीं करने पर एक लाख 20 हजार रूपये की राशि राजसात हुई – जाने क्या है पीयूसी ?

Scn news india

 

हर्षिता वंत्रप 

भोपाल-कलेक्टर श्री तरूण कुमार पिथोड़े के निर्देशानुसार जिले में प्रदूषण नियंत्रण की कार्यवाही के अंतर्गत सभी डीजल-पेट्रोल पम्पों पर पीयूसी यंत्र की स्थापना के लिए कहा गया है।
जिला आपूर्ति नियंत्रक भोपाल द्वारा डीजल-पेट्रोल पम्पों की जाँच की गई। जाँच के दौरान 12 डीजल-पेट्रोल पम्प संचालकों द्वारा पूर्व मे निर्धारित समय-सीमा में पीयूसी स्थापना नहीं करने पर एक लाख 20 हजार रूपये की प्रतिभूति राशि राजसात की गई  है। पूर्व में दी गई समय-सीमा में पीयूसी स्थापना नहीं करने पर मध्यप्रदेश मोटर स्प्रिट तथा हाई स्प्रिट डीजल-ऑयल अनुज्ञापन तथा नियत्रंण आदेश 1980 के अंतर्गत 12 डीजल-पेट्रोल पम्प की राशि राजसात की गई है।
जिला आपूर्ति नियंत्रक अधिकारी ने बताया कि जारी निर्देशों के उल्लंघन पर एचपी ऑटो सेंटर पीएनटी चौराहा, बंसल मेट्रो प्लाजा, हलालपुरा, पुलिस कल्याण फिलिंग स्टेशन, नेहरू नगर, तत्पर एड हॉग, गौतम नगर, इब्राहिम अली इमदाद अली पेट्रोल पम्प, रॉयल मार्केट, हैप्पी फ्यूल सेंटर, सुल्तानिया रोड, करतार फिल एंड फलाय, फंदा, यूनाईटेड सेल्स एंड सर्विस, खजूरी रोड, आई.बी.पी.फंदा, फंदा, ताज सर्विस स्टेशन, सुल्तानिया रोड एवं भोपाल सर्विस स्टेशन, रॉयल मार्केंट भोपाल पर 10 – 10 हजार रूपये इस प्रकार कुल एक लाख 20 हजार इस प्रकार रूपये की प्रतिभूति राशि राजसात की गई है। 55 डीजल/पेट्रोल पम्पों में से 11 डीजल/पेट्रोल पम्पों में पीयूसी  यंत्र की स्थापना कर ली गई है। शेष 44 डीजल/पेट्रोल पम्पों में पीयूसी स्थापना की कार्यवाही जारी है। 15 दिसम्बर के पश्चात पीयूसी की स्थापना नहीं होने पर इन डीजल/पेट्रोल पम्पों के विरूद्ध भी कार्यवाही की जायेगी।

क्या है पीयूसी ?
PUC का फुल फॉर्म है पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल। इसकी जांच को कहते हैं पीयूसी टेस्ट। इस जांच के बाद ही किसी गाड़ी को पीयूसी सर्टिफिकेट दिया जाता है। गाड़ियों से जो धुआं  निकलता है, वह पर्यावरण  के लिए खतरनाक हो सकता है, इस तरह के प्रदूषण के लिए पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए जो मानक  तय किए गए हैं, उनके मुताबिक ही आपकी गाड़ी का धुआं प्रदूषण फैला रहा है, इस बात की पुष्टि करने के लिए एक जांच  के बाद जो सर्टिफिकेट जारी किया जाता है, उसे पीयूसी कहते हैं।  भारत में मोटर या इंजन वाली सभी गाड़ियों के लिए यह अनिवार्य है।

कैसे होती है पीयूसी जांच ?
डीज़ल वाहन के लिए एक्सलरेटर को पूरी तरह दबाया जाता है और धुएं के प्रदूषण की रीडिंग ली जाती है. ऐसा पांच बार करने के बाद एवरेज निकालकर फाइनल रीडिंग ली जाती है।  वहीं, पेट्रोल वाहन के लिए एक्सलरेटर नहीं दबाया जाता और केवल एक बार रीडिंग ली जाती है। जांच के लिए एक गैस एनालाइजर को एक ऐसे कंप्यूटर से जोड़ा जाता है जिसमें कैमरा और प्रिंटर भी जुड़ा हो। यह गैस एनालाइजर गाड़ी से निकलने वाले प्रदूषण  के आंकड़ों की जांच करता है और इसे कंप्यूटर को भेजता है। जबकि कैमरा गाड़ी के लाइसेंस प्लेट की फोटो लेता है। अगर गाड़ी से निश्चित दायरे के अंदर प्रदूषण निकल रहा हो, तो पीयूसी सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

All rights reserved by "scn news india" copyright' -2007 -2019 - (Registerd-MP08D0011464/63122/2019/WEB)  Toll free No -07097298142
जनस
error: Content is protected !!