आयुर्वेद की ताकत: आस्ट्रेलिया एवं श्रीलंका में इलाज करा चुके जयसूर्या को छिंदवाड़ा के आयुर्वेद डॉक्टर ने 72 घंटे में पैरों पर खड़ा किया

Scn news india
मनोहर
पाठको को बता दे की 2017 -2018  में अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के लिए जाने जाने वाले जयसूर्या की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि वो बिना बैसाखी के एक कदम भी चल पाने में समर्थ नहीं थे । आस्ट्रेलिया , श्रीलंका सहित दुनियाँ भर में उपचार  करा चुके जयसूर्या को कोई राहत नहीं मिली ,तब छिंदवाड़ा के आयुर्वेद डॉक्टर ने  उन्हें 72 घंटे में पैरों पर खड़ा किया।
 प्रकाशन का उदेश्य प्रदेश के सतपुड़ांचल  अंतर्गत   छिंदवाड़ा  जिले के पातालकोट में व्याप्त आयुर्वेद की अलौकिक शक्ति को बताना है जिसका  पौराणिक   ग्रंथो  में भी वर्णन मिलता है। जहाँ आयुर्वेद जड़ी बूटियों का आपार भण्डार मौजूद है। जहाँ कई आसाध्य रोगो से छुटकारा दिलाने की चमत्कारिक ताकत रखने वाली जड़ी बूटियां मौजूद है।  जिस पर भारत सरकार को रिसर्च करना चाहिए।
बता दे  कि श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर सनत जयसूर्या को जुन्नारदेव के आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. प्रकाश टाटा ने इलाज करके 72 घण्टे में पैरों पर खड़ा कर दिया। गौरतलब है कि श्रीलंका क्रिकेट टीम पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी सनत जयसूर्या ने अपने कमर एवं पैर में आई कुछ गंभीर बीमारियों के चलते बिस्तर पकड़ लिया था, यदि उनको थोड़ा बहुत चलना भी पड़ा तो बैशाखी का सहारा लेते थे, इस बीमारी के चलते जयसूर्या ने आस्ट्रेलिया (मेलबोर्न) में न सिर्फ आपरेशन कराया अपितु श्रीलंका के कोलंबो स्थित नवलोक अस्पताल में भर्ती रहे। किन्तु इन्हें कहीं से भी राहत नहीं मिली।
अजहर ने दी थी सलाह
जयसूर्या की इस हालत को देख भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मो. अजहरूदीन काफी दुखी हुए। एवं आयुर्वेद जड़ी बुटियों से इलाज करने वाले डॉ. टाटा से एक बार इलाज कराने की सलाह दी। अजहरूदीन की सलाह मान जयसूर्या मुम्बई आए एवं डॉ. टाटा के निवास स्थान पर गए और अपनी बीमारी से उन्हें अवगत कराया जिसके बाद डॉ. टाटा ने उनका परीक्षण किया और ठीक करने से संबंधित आश्वासन दिया।
पतालकोट में जड़ी-बूटियों की खोज
डॉ टाटा भलीभांति इस बात को जानते थे, कि जयसूर्या इस बीमारी से निजात पाने आस्ट्रेलिया एवं श्रीलंका में इलाज करा चुके हैं। किन्तु उन्हें राहत नहीं मिल पाई। वैद्यराज माखन विश्वकर्मा के साथ पतालकोट के घने जंगलों में गए और एक सप्ताह वहॉ रुककर जड़ी-बूटी तलाश की एवं वहां से जड़ी-बूटी निज निवास लाकर छिंदवाड़ा में दवाईया बनाई।
आयुर्वेद जड़ी-बूटियों की आवश्यक दवाओं को एकत्रित कर डॉ. टाटा सहयोगीजन जय हो फाउंडेशन के अध्यक्ष तरूण तिवारी के साथ श्रीलंका रवाना हो गए। एवं श्रीलंका पहुंचने पश्चात जयसूर्या का इलाज प्रारंभ किया एवं महज 72 घण्टे का समय लिया एवं जयसूर्या को उनके पैरो पर खड़ा कर दिया।