बकलोल बोल: ढकोसला -एक ही मामले में कहीं रासुका तो कहीं महज 25 हजार का जुर्माना-दिखावे की कारवाही

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वरिष्ठ पत्रकार की बेबाक कलम 
जो डॉ लश्करे एक मरीज से ढाई लाख वसूल रहा,उस पर रासुका की जगह महज 25 हजार का जुर्माना!
बैतूल। रेमडेसिविर की कालाबाजारी के प्रमाणित मामले में जिस तरह से एमडी डाक्टर मनीष लश्करे सस्ते में छूट गया, उसकी आम लोगो मे बहुत तीखी और मुखर प्रतिक्रिया सामने आ रही। लोगो अब सीएम के उस दावे पर सवाल उठा रहे है जिसमे उन्होंने इंजेक्शन, आक्सीजन की कालाबाजारी में रासुका लगाने की बात कही थी। जिस तरह डॉ लश्करे बच निकले उसमे लोगो के मन मे यह सवाल तो उठेगा ही कि क्या यह महज एक जुमला था ? क्या सीएम झूठ बोल रहे थे? अब इस बात का जबाब तो कलेक्टर को ही देना चाहिए क्योंकि सीएम की घोषणा का परिपालन करना उनका उत्तरदायित्व है। हो सकता कलेक्टर को पब्लिक फीडबैक और गुस्से की जानकारी न हो। ऐसा होना स्वभाविक है क्योंकि कलेक्टर जैसे अफसर की आम लोगो से कनेक्टिविटी तो होती नही इसलिए उन्हें ज्ञात नही होगा और उनका फीडबैक सोर्स भी हो सकता है कि पुख्ता न हो।
वैसे सोशल मीडिया पर जो पोस्ट कमेंटस आ रहे वो तो चीख चीख कर कह रहे कि प्रशासन की कार्रवाई ढकोसला है। लोगो का कहना है कि अभी आपदा को देखते हुए यदि रासुका नही लगा रहे तो मत लगाओ, अस्पताल भी मत सील करो पर कम से कम ऐसा तो कुछ करो कि जो मिसाल बन जाए। लश्करे से भी ज्यादा जो इलाज के नाम पर लूट मचा रहे वो सोच में पड़ जाए।
– यह लोगो का फीडबैक
1.लश्करे के पास करोड़ो की दौलत है ,सब बैतूल के लोगो से ही कमाई हुई है ,इसलिए इससे कम से कम 50 लाख रेडक्रॉस में जमा करवाए जाए। इससे ज्यादा तो इस कोरोना सीजन में वह पीट चुका है।
2. उसके अस्पताल में एक माह तक सिर्फ जरूरतमंद गरीब लोगों का फ्री इलाज करवाया जाए , यदि इलाज में किसी की मौत होती तो उससे कम से कम एक लाख की क्षतिपूर्ति उस परिवार को दिलवाई जाए।
3. उससे कम से कम दस हजार 18 प्लस वालो का फ्री वैक्सीनेशन करवाया जाए, दोनो डोज की वैक्सीन का पैसा उससे वदुल किया जाए।
4. जिला अस्पताल में उससे कम से कम 50 वेंटिलेटर वाला एक कोविड सेंटर का निर्माण करवाया जाए । जिसमे कम से कम 200 बिस्तर हो।
लोगो का कहना है कि अगर रासुका जैसी कार्रवाई से राहत दी जा रही है तो इतना तो बनता है। वैसे भी इन्होंने जीवन भर कमाया है सामाजिक सरोकार के लिए खर्च कभी किया ही नही। लोग तो कहते है कि खुद पर भी इनका ज्यादा खर्च नही है। इसलिए तो इन्होंने जगह जगह प्रापर्टी खरीद रखी है। लोगो की बात इसलिए भी जायज लगती है कि जब सीएम का रासुका वाला दावा इनकी वजह से जुमला साबित हो रहा तो कम से कम पब्लिक इंट्रेस्ट में इनसे कुछ तो अच्छा करवा लिया जाए।

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