पत्रकार ने कहा कार्यवाही नहीं हुई तो कर लूंगा आत्महत्या, प्रभारी मंत्री ने की घटना की निंदा- कहा होगी कारवाही

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ज्ञानू लोखंडे बैतूल / मनोहर भोपाल 

बैतूल -प्रदेश सरकार के 17 दिसम्बर को एक वर्ष पूरे होने जा रहे है। जिसको लेकर रविवार शाम को कलेक्टर कार्यालय में पत्रकार वार्ता आयोजित हुई। जिसमें जिले के प्रभारी मंत्री कमलेश्वर पटेल, पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे, बैतूल विधायक निलय डागा, घोड़ाडोंगरी विधायक ब्रह्मा भलावी, कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुनील शर्मा, पूर्व विधायक विनोद डागा, जिला सहकारी बैंक के प्रशासक अरुण गोठी प्रमुख रूप से उपस्थित थे। पत्रकार वार्ता में सभी पत्रकारों ने यूएनआई एजेंसी के जिला प्रमुख पत्रकार वामन पोटे के साथ गत दिनों भैसदेही के कांग्रेस के पदाधिकारियों द्वारा की गई अभद्रता के मामले को जोर-शोर से उठाया। प्रभारी मंत्री श्री पटेल ने पत्रकार के साथ हुई अभद्रता की कड़ी निंदा की है। और कहा कि इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा उस पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।पत्रकारों ने मंत्री से कहा कि अभी तक अभद्रता करने वाले कांग्रेसियों पर कोई कार्यवाही नहीं की है । जवाब देते हुए मंत्री श्री पटेल ने कहा कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं था अब इस मामले की पूरी जांच करेंगे। पत्रकार वामन पोटे ने मंत्री के सामने कहा कि अगर दोषियों पर कार्यवाही नहीं हुई तो वह आत्महत्या कर कर लेगे जिसकी जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी। पत्रकारों ने प्रभारी मंत्री से कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ पत्रकारों को सुरक्षा देने की बात करते हैं और बैतूल में कांग्रेसी ही पत्रकारों के साथ अभद्रता कर जान से मारने की धमकी देने लगे है।

क्या थी घटना 

विगत दिनों समाचार संकलन हेतु  पत्रकार वामन पोटे भैंसदेही पंहुचे थे जहाँ कांग्रेस नेताओ  पर आरोप है कि उन्होंने पत्रकार पर अवैध वसूली का आरोप लगते हुआ , कमरे में बंद किया , मारपीट की , अभद्र भाषा का प्रयोग किया एवं सार्वजनिक रूप से बस स्टेण्ड पर नारेबाजी करते हुए जुलुस निकाल उन्हें अपमानित किया। 

सवाल 

१. क्या कांग्रेस नेताओ का कानून पर से विश्वास उठ गया , जबकि सरकार उन्ही की है प्रदेश में  ?

२. क्या कांग्रेसी नेता कानून से अपने को ऊपर मानते है  ?

३. यदि पत्रकार ने कोई गलत काम किया है तो थाने में शिकायत क्यों नहीं की  ? 

४. सरेआम किसी की मान प्रतिष्ठा को धूमिल करने का अधिकार किसने दिया  ?

५. प्रदेश में जब आम नागरिक को किसी भी विरोध प्रदर्शन से पूर्व एसडीएम से अनुमति लेना अनिवार्य है तो पत्रकार के विरोध प्रदर्शन का वीडियों वायरल होने के बाद भी जिला प्रशासन ने संज्ञान क्यों नहीं लिया ?

ऐसी घटनाओं की निंदा से ज्यादा जरुरी है कानूनी कारवाही , ताकि ऐसी घटनाओ की भविष्य में पुनरावृत्ति ना हो , इसलिए  आज आवाज उठाना जरुरी हो जाता है। अन्यथा कुंठित मानसिकता की प्रवृत्ति का शिकार आज वामन राव पोटे हुए है तो कल कोई और होगा। जिसका उदहारण इंदौर में हुई हाल की घटना है। निजी स्वार्थ के चलते धड़ों में बटे देश के चौथे स्तंभ के लिए चिंतन का विषय है। 

 

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