सूखी स्टीविया की पत्ती मार्केटिंग हेतु भेजा गया राजस्थान, शुगर पीड़ित भी खा सकेंगे मीठा

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मोहम्मद आज़ाद 

अजयगढ  -पन्ना जिले के ग्राम गुठला प्रतापपुर विकास खण्ड अजयगढ के कृषक श्री रामलगन पाल पिता श्री चेहनूपाल को सहायक संचालक उद्यान जिला पन्ना द्वारा स्टीविया पौध रोपण लगाने हेतु प्रोत्साहित किया। कृषक रामलगन पाल द्वारा 0.25 हेक्टेयर में स्टीविया पौध रोपण किया गया। जिसमें लगभग 4.50 क्विंटल सूखी स्टीविया की पत्ती की मार्केटिंग अम्बिका प्रसाद पटेल शुभम औषधीय रोपणी जबलपुर द्वारा क्रय कर विक्री हेतु खजुराहो स्टेषन बाई ट्रेन द्वारा उदयपुर (राजस्थान) भेजा गया। जिसमें कृषक को चेक के माध्यम से राषि 31 हजार रूपये प्राप्त हुई। अन्य किसानों की स्टीविया के पत्ती भी इनके द्वारा क्रय की जावेगी। कृषक द्वारा बताया गया कि उनके द्वारा खेत तैयार कराकर मेड़ों में स्टीविया के पौधे 15 से.मी. पौध से पौध की दूरी एवं 45 से.मी. कतार से कतार की दूरी पर रोपित किये गये। जिले में स्टीविया की खेती किये जाने हेतु कृषक द्वारा कार्यालय/फील्ड स्तर पर लगातार जानकारी ली गई।

क्या है स्टीविया 

सहायक संचालक उद्यान ने बताया है कि पन्ना जिले के लिये यह अलग से मीठी क्रांति के रूप विषेष उपलब्धि साबित होगी। स्टीविया की खेती से कृषकों का सालाना प्रति एकड़ 1.40 लाख की आय प्राप्त होगी। उल्लेखनीय है कि आज विष्व में मधुमेह के रोगियों की संख्या बढ़ रही है स्टीविया लो कैलोरी के कारण मधुमेह के रोगी आराम से खा सकते है। स्टीविया की पत्ती शक्कर से 30 गुना अधिक मीठी होती हैै तथा स्टीविया पत्ती से निर्मित पाउडर शक्कर से 300 गुना अधिक मीठा रहता है। मधुमेह के उपचार के लिए मधुपत्र, मधुपर्णी, हनी प्लांट या मीठी तुलसी (स्टीविया) की पत्तियों की मांग बढ़ रही है।

मधुमेह पीड़ितों के लिए बेकरी उत्पाद, सॉफ्ट ड्रिंक और मिठाइयों में भी मधुपत्र ( मीठी तुलसी )की सूखी हुई पत्तियों का उपयोग होता है। मधुपत्र की पत्तियों की कीमत थोक में करीब 250 रुपए किलो तथा खुदरा में यह 400-500 रुपए प्रति किलो तक होती है। मधुपत्र के पौधों से हर तुडाई में प्रति एकड़ 2500 से 2700 किलो सूखी पत्तियां मिल जाती हैं। यह देखते हुए किसान इनको उगाकर खासी कमाई कर सकते हैं।

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