बड़ी धूमधाम से हुआ रुक्मणि श्री कृष्ण भगवान का विवाह सुंदर झांकियों ने मोह लिया भक्तों का मन

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अमर सेन पटेरा 

पं ऋषिकांत गर्ग जी ने बताया कि श्री कृष्ण के पास जब रुक्मणी ने संदेश भेजा था कि रुक्मणी के घरवाले इनका विवाह कहीं और करना चाहते हैं तब उन्होंने श्री कृष्ण से कहा वह श्री कृष्ण से ही विवाह करना चाहती हैं क्योंकि विश्व में उनके जैसा अन्य कोई पुरुष नहीं है,भगवान श्री कृष्ण के गुणों और उनकी सुंदरता पर मुग्ध होकर रुक्मणी ने मन ही मन निश्चय किया कि वह श्रीकृष्ण को छोड़कर किसी को भी पति के रूप में वरण नहीं करेंगी, उधर श्री कृष्ण भगवान को भी इस बात का पता लग चुका था कि रुकमणी परम रूपवती तो है ही इसके साथ साथ परम सुलक्षणा भी हैं,अपने वर्णन में उन्होंने बताया कि भीष्मक का बड़ा पुत्र रुकनी भगवान श्री कृष्ण से शत्रुता रखता था वह अपनी बहन रुक्मणी का विवाह शिशुपाल से करना चाहता था। तब भगवान को पत्र लिखकर निमंत्रण दिया द्वारकाधीश भगवान ने निमंत्रण को स्वीकार किया ओर फिर विधिवत विवाह किया कथा के मध्य में ही बड़ी धूमधाम से बारात की आगावनी की गई बारात बनवार से प्रारंभ होकर के पटना पहुंची जहां पर भगवान का भव्य रूप से स्वागत किया गया उसके पश्चात सभी बाराती भगवान को लेकर कथा स्थल पर पहुंचे जहां पर उनका तिलक हुआ फिर बड़ी धूमधाम से रुक्मणि श्रीकृष्ण का विवाह संपन्न हुआ भक्तों ने जमकर नृत्य किया पंडाल में वृंदावन जैसा माहौल बन गया इस मौके पर बनवार, मुंवार, झरौली, खमरिया, पटना, परस्वाहा सहित अन्य ग्रामीण अंचलों के श्रद्धालुओं ने आंनद लिया