चीन ने पहली बार स्वीकार की गलवान घाटी संघर्ष में अपने सैनिकों के मारे जाने की बात

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चीन ने पहली बार स्वीकार किया है कि गलवान घाटी में  भारतीय सेना के साथ झड़प में उसका एक अधिकारी और चार सैनिक मारे गये थे। इस संघर्ष में भारतीय सेना के बीस जवान शहीद हो गये थे लेकिन चीन ने तब अपने सैन्‍यकर्मियों के मारे जाने की जानकारी नहीं दी थी। चीन के सरकारी मीडिया ने आज बताया कि केन्द्रीय सैन्य कमीशन ने पिछले वर्ष जून में गलवान घाटी में मारे गये अधिकारी और सैनिकों के नाम उजागर किये हैं।

ये उस समय काराकोरम पहाड़ियों पर तैनात थे। ये हैं- पीएलए शिंजियांग मिलिट्री कमांड के रेजिमेंटल कमांडर क्‍वी फबाओ, चेन हांगजुन, चेन शियांगरोंग, शियाओ सियूआन और वांग झूओरान।

चीन ने ऐसे समय ये नाम उजागर किए हैं, जब दोनों देश सात महीने के लम्बे गतिरोध के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात अपने सैनिको को वापस बुला रहे हैं। भारत ने अपने शहीद सैनिकों का सम्मान किया था, जबकि चीन ने मारे गए सैन्‍य‍कर्मियों की संख्या भी नहीं बताई थी।

पिछले वर्ष मई में चीनी सेना अपनी सामान्‍य स्थिाति से आगे बढ़़ आई थी और दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़प हुई थी। झड़प में भारत के बीस सैनिक शहीद हुए थे। चीन के बड़ी संख्या में सैनिकों के भी मारे जाने की खबर थी लेकिन चीन ने पहले कभी स्वीकार नहीं किया था।

10 फरवरी को चीन ने पैंगोंग झील के दक्षिणी और उत्तरी दोनों किनारों पर तैनात अपने सैनिकों को पीछे हटाने की घोषणा की थी। सैनिकों के पीछे हटने के पहले चरण के बाद वरिष्ठ सैन्य कमांडर बैठक करेंगे और अन्य क्षेत्रों से भी सैनिकों को पीछे हटाने पर बात करेंगे।

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