जब व्यक्ति का पुण्य खोटा होता है तो उसके भाव भी खोटे हो जाते है-विरंजन सागर द्रोणागिरी भवन में चल रहे प्रवचन

Scn news india

प्रद्युमन फौजदार
बडामलहरा/आज हम सभी पुण्य की योग से समवशरण में विराजे हैं।जिनेंद्र देव की देशना सुन रहे हैं भगवान की देशना पुण्य के योग से सुनने मिलती है राजा तो हर कोई बन जाता है गति तो सबको मिल जाती है। उक्त उद्गार मुनिश्री विरंजन सागर ने नगर के द्रोणगिरि भवन में चल रहे समवशरण विधान के पावन अवसर पर धर्मसभा में प्रवचन के दौरान व्यक्त किये। मुनिश्री ने कहा कि गुरु की वाणी भगवान की देशना सौभाग्य से सुनने को मिलती है। आठ भूमियां होती हैं समवशरण में वही जीव जाता है जिसकी पुण्य की तीव्रता हो समवशरण का विस्तार 12 योजन था घटते घटते महावीर स्वामी के काल में एक योजन बचा है। समवशरण का स्थान बहुत सुंदर होता है ना नदी होती हैं सरोवर होते हैं।

 

इस भूमि पर अगर मिथ्या दृष्टि जीव आता है तो वह नाटक भूमि में ही मस्त हो जाता है और वहीं से वापस चला जाता है समवशरण में 20000 श्रेणियां होती 12 सभाएं लगती हैं भगवान की वाणी ओंकार रूप में खरती है सभी जीव अपनी-अपनी भाषा में समझ लेते हैं गणधर सभी की शंकाओं का समाधान करते हैं इस समवशरण का प्रभाव होता है की सिंह भी अपने क्रूर भाव छोड़कर अहिंसक होकर बैठते हैं। अहिंसामयी जीवन जीने की बात यहां बताई जाती है यह समवशरण का प्रभाव होता है जैसे शेरनी के दूध को रखने के लिए सोने की धातु जैसा उच्च पात्र चाहिए उसी प्रकार भगवान की देशना सुनने के लिए उच्च भाव चाहिए जब व्यक्ति का पुण्य खोटा होता है तो उसके भाव और विचार भी छोटे हो जाते हैं। सब पुण्य की बात होती है। हे भव्य आत्माओं-आप पुण्यशाली जीव हो पुण्य को पुण्य में लगाइए। भगवान को दोष देते हो भगवान किसी को अमीर गरीब नहीं बनाते उसके पुण्य पाप से होता है सौधर्म इंद्र के हाथ में पूरा स्वर्ग होता है उनकी पुण्य के कारण और पुण्य को पुण्य में लगाता है। लोगों के पास धन वैभव अपार होता है इस वैभव को और वैभव बढ़ाने में लगाता है और एक पुण्य में लगाता है भावों की कीमत होती है पैसा तो सबके पास होता है।इसी दौरान प्रवचन सभा में उपस्थित क्षेत्रीय विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी ने मुनि श्री से पूछा मैं राजा बनूं या ना बनूं मुझे अगले जन्म में जैन कुल में जन्म मिले इसके लिए मुझे क्या करना होगा मुनि श्री ने उत्तर देते हुए कहा हे भव्य जीव जैन धर्म कोई अलग नहीं है जिसने इंद्रियों को जीत लिया वही जैन है आपका आचरण उत्कृष्ट है ऐसा ही पुरुषार्थ करते रहिये जरूर जैन धर्म मिलेगा प्रवचन सभा में सौधर्म इंद्र शील डेवडिया, शचि इंद्राणी मंजुला डेवडिया,रविंद्र बाजाज, आशीष जैन अरोरा, विक्की जैन ,मुकेश एसटीडी सतीश मोदी ,सुशील मोदी ,शिखर चंद कर्री, प्रकाश जैन,पं. शिखर चंद जैन गोकलचंद सूरजपुरा ,उपमंत्री कमल जैन मा. भागचंद्र ,जैन महेंद्र जैन मेडिकोज,सेठ बाबूलाल जैन घुवारा, महेन्द्र बडागांव, सिद्धायतन ट्रस्ट के ट्रस्टी सेवक चंद्र जैन,चंद्रभान जैन डूंडा सहित समूचा जै समाज उपस्थित रहा
सौधर्म इंद्र और चक्रवर्ती की हुई सभायें
रात्री कालीन सभा में आयोजित हो रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला में सौधर्म इंद्र और चक्रवर्ती की सभायें आयोजित हुई जिसमें सौधर्म इंद्र और शचि इंद्राणी ने इंद्र- इंद्राणियों की विभिन्न शंकाओं का समाधान बेहद सरल और सहज भाव से किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

All rights reserved by "scn news india" copyright' -2007 -2019 - (Registerd-MP08D0011464/63122/2019/WEB)  Toll free No -07097298142
जनस
error: Content is protected !!