मुर्गा लड़ाई पर लग रहा हजारों का दाव चल रहा जुआ बिगड़ रही गांव की शांत फिजा, पुलिस बेखबर

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दिलीप पाल 

आमला. बोरदेही थाना क्षेत्र के बडढ़ाना में जुआ-सट्टा लंबे अर्से से चल रहा है। फर्क बस इतना है कि हार-जीत के इस खेल में नये-नये तरीके अपनाये जा रहे है। कभी तास के पत्तों पर, तो कभी मुर्गो की आपसी लड़ाई पर दांव लगाये जा रहे है। इस खेल में युवाओं से लेकर बुजूर्ग तक दिलचस्पी दिखा रहे है। जिससे गांव की फिजा अशांत होते जा रही है। इस खेल पर रोक लगाने अब तक कोई ठोस कार्रवाही नहीं हो सकी है। यहीं वजह है कि जुआरियों द्वारा खुलेआम बडढ़ाना में यह अवैध खेल संचालित किया जा रहा है। जुआ संचालित करने वाले लोग दो मुर्गो को आपस में लड़ाते है और लोग इनकी हार-जीत पर पैसा लगाते है। सुबह से देर शाम तक सौ से लेकर हजारों रूपयों का दांव मुर्गो की लड़ाई पर लग रहा है। जबकि जिला पुलिस अधीक्षक ने सभी थाना प्रभारियों को जुआ-सट्टा और अवैध गतिविधियों पर पूर्णत: अंकुश लगाने के निर्देश दिये है, लेकिन बडढ़ाना में मुर्गो की लड़ाई पर लग रहे जुआ-सट्टा से स्थानीय पुलिस प्रशासन अभी भी इससे बेखबर है।

विवाद का कारण बन रही मुर्गा लड़ाई

किसी जमाने में मुर्गा लड़ाई को मनोरंजन का खेल माना जाता था। लेकिन पक्षियों का यह खेल अब सट्टा लगाने का जरिया बन गया है। ग्रामीणों ने बताया कि इस खेल में दांव लगाने के लिए गांव के अलावा शहरी क्षेत्र से भी लोग पहुंचते है और देर रात तक खेल चलता है।मुर्गा लड़ाई स्थल शराब भी परोसी जाती है। नशे में मुर्गों के खूनी संघर्ष का रोमांच और बढ़ जाता है। कई बार मुर्गा लड़ाई विवादों का कारण भी बन जाती है। मुर्गो की लड़ाई पर लगने वाले हार-जीत के दांवों को लेकर कई बार लोग आपस में भिड़ जाते है। जिससे बडढ़ाना की शांती फिजा अशांत होते जा रही है।

अवैध धंधे का दिनोंदिन बढ़ रहा क्रेज

गांव-कस्बों में दिनोंदिन मुर्गा लड़ाई का क्रेज बढ़ रहा है। मुर्गों पर हजारों रूपये का दांव लग रहा है। इस जुए में घर बर्बाद भी हो रहे हैं। लेकिन पुलिस है कि इस खेल पर प्रतिबंध लगाने में नाकाम साबित हो रही है। जानकारी के अनुसार इस खेल में युवाओं की भागीदारी ज्यादा है, जो खेल पर रूपये का दांव लगाते है। कभी कभार इस अवैध खेल पर पुलिस की छापामार कार्रवाही होती भी है, तो जुआरी अपना स्थान बदलकर फिर से खेल संचालित कर देते है।

कानूनी तौर पर है अपराध

मुर्गा लड़ाई का खेल कानूनी तौर पर अपराध की श्रेणी में आता है। पशु कु्ररता व अत्याचार निवारण अधिनियम 1960 के तहत मुर्गा लड़ाई को गैरकानूनी माना जा सकता है। पुलिस दबिश देकर इस खेल के शौकीनों के खिलाफ जुआ एक्ट के तहत कार्रवाई कर सकती है। पशु-पक्षियों की लड़ाई पर सुप्रीम कोर्ट ने भी रोक लगा रखी है। अभी तक तो इस लड़ाई पर मुर्गा लाने वाले ही दांव लगा रहे हैं। बडढ़ाना में इस खेल के प्रति युवा वर्ग का ज्यादा रुझान देखने को मिल रहा है।

इनका कहना है……..

आपके माध्यम से सूचना मिली है। कल ही उक्त स्थान पर दबिश देकर जुआ पकडऩे की कार्रवाही की जायेगी।

नम्रता सोंधिया, एसडीओपी, मुलताई