ईंट भट्टों के लिए बेशकीमती अर्जुन वृक्षों का बेरहमी से कत्ल धरमपुर रेंज अंतर्गत भसूंड़ा में रुंझ नदी के किनारे एक माह में कटे सैकड़ों वृक्ष

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मोहम्मद आज़ाद 

अजयगढ़। पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में बेशकीमती अर्जुन वृक्ष कौहा के वृक्षों का बेरहमी से कत्ल कर ईट भट्टों में झोंका जा रहा है। विदित हो कि अर्जुन वृक्ष महत्वपूर्ण औषधीय वृक्ष है, जिसकी छाल, फल व पत्तियां औषधियों में इस्तेमाल होते हैं। इसकी छाल से हृदय रोग के लिए सबसे लाभकारी दवा बनती है, प्राचीन काल से लेकर वर्तमान काल तक इस वृक्ष को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है।

परंतु वर्तमान में कुछ लालची लोग इस वृक्ष का बेरहमी से कत्ल कर रहे हैं। वन विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के चलते यह बेशकीमती और बहुपयोगी वृक्ष तेजी से विलुप्त हो रहे है।ं अधिकांश नदियों के किनारे पाए जाने वाले इन बृक्षों को तेजी से काटा जा रहा है। वर्तमान में उत्तर वन मण्डल अंतर्गत धरमपुर रेंज अंतर्गत भसूंड़ा बीट में रूंझ नदी किनारे पुल के पास बंधा घाट से लेकर चिल्ला घाट तक एक माह में सैकड़ों की संख्या में अर्जुन वृक्षों का बेरहमी से कत्ल कर दिया गया,

स्थानीय लोगों की माने तो यह अवैध कटाई बीट गार्ड नंदराम अहिरवार, और वन समिति के सुरक्षा श्रमिक पप्पू कोरी की जानकारी में की गई, ग्रामीणों द्वारा बार-बार सूचना देने के बावजूद बन विभाग के जिम्मेदारों से लेकर राजस्व विभाग के पटवारी और आर.आई. द्वारा भी इसे अनदेखा किया जाता रहा, जिससे हरियाली से सजा रहने वाला यहां का रूंझ नदी का किनारा अब सूना लगने लगा है। ग्रामीणों ने बताया कि स्थानीय ईट भट्ठा संचालित करने वालों द्वारा इन बृक्षों को कटवाया जा रहा है। जिससे यह दुर्लभ जड़ी बूटी के वृक्ष विलुप्त होने के साथ-साथ नदी के किनारे मिट्टी के कटाव की वजह से नदी के अस्तित्व पर भी खतरा मड़रा रहा है। स्थानीय लोगों द्वारा समाचर पत्र के माध्यम से जिम्मेदारों का ध्यान आकृष्ट कराते हुये औषधीय गुणों वाले अति महत्वपूण अर्जुन बृक्षों की कटाई करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।