उद्योग स्थापना की ओर एक कदम -“वेस्ट टू बेस्ट” स्वसहायता समूह की महिलाओं ने बना दिया राख से साबुन,अब बनाएंगे और भी प्रोडेक्ट

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सही मायने में आपदा को अवसर में बदला 

जागृत हुए मातृशक्ति 

“वेस्ट टू बेस्ट” स्वसहायता समूह की महिलाओं ने बना दिया राख से साबुन

यूँ तो देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं बस जरुरत है तो एक अवसर की ,  देर सबेर ही  सही लेकिन हुनर और प्रतिभा उभर कर सामने आ ही जाती है। ऐसा ही उदहारण प्रस्तुत किया है। आदिवासी अंचल बैतूल जिले के एक छोटे से नगर सारनी के स्वसहायता समूह की महिलाओं ने , जिन्होंने ना केवल “वेस्ट टू बेस्ट” किया है। बल्कि “वेस्ट टू बेस्ट” से  आमदनी प्राप्त कर जीवन यापन का जरिया बनाने के साथ  पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अभिनव प्रयास किया है।और “आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है” के पर्याय को बदलते हुए “समस्या का समाधान भी आवश्यकता की जननी होती है’ बता  दिया है ।

जब हम बात सारनी की कर रहे है तो हमारे जहन में विद्युत नगरी सारणी की पहचान सतपुड़ा थर्मल पॉवर प्लांट ताप विद्युत गृह का आना स्वाभाविक है। जहाँ की सबसे बड़ी समस्या राख है। जिसके निष्पादन हेतु सरकार ,प्लांट प्रबंधन और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल सभी चिंतित है। जिसके निपटान हेतु लिए करोड़ों अरबों रुपये का खर्च कर तमाम उपाय किये गए है। किन्तु फिर भगी राख एक समस्या ही है।

बता दें कि बिजली उत्पादन हेतु प्रति दिन सैकड़ो टन कोयला बॉयलर में जलाया  जाता है। जिसका वेस्ट  प्रतिदिन सैकड़ों टन राख के ढेर के रूप में जमा हो जाता है। जिसे पानी के साथ मिला कर राखड़ डेम भेज दिया जाता है। लेकिन इसके बाद भी भारी मात्रा में राख बॉयलर व् आसपास उड़ कर जमा हो जाती है। जिसके  उठाव हेतु प्लांट प्रबंधन सदैव चिंतित रहता है। जिसके  मुफ्त में उठाव करने समय समय पर लोगो को प्रेरित किया जाता है। काफी मात्रा में ये राख बड़े बड़े उद्योगों द्वारा  उठा कर ले जाई जाती है। तो वही ऐश ब्रिक्स राख से ईंटे बनाने और निर्मित ईंटों को सरकारी भवनों में 75 % मात्रा में उपयोग किये जाने के अनिवार्यता के भी सरकारी आदेश है।
इसी दिशा में सारनी शहर की  मध्यप्रदेश शहरी आजीविका मिशन से जुडी स्वसहायता समूह की महिलाओं ने एक सफलतम  नवाचार प्रयोग किया और इस राख से बर्तन धोने का झागयुक्त साबुन निर्माण कर ना  केवल स्वयं के रोजगार के रास्ते  खोले ,बल्कि  शासन को भी इस राख की समस्या के निष्पादन का एक रास्ता सुझाया है।

यदि इस दिशा में प्रयास किये जाते है तो बड़े पैमाने पर लघु उद्योगों के माध्यम से भी राख का उठाव हो सकता है और लोगों को रोजगार के साथ आमजनमानस को राख युक्त बरतन धोने का सस्ता साबुन भी उपलब्ध हो सकता है। जो हर घर की जरूरत है। और बड़ी मात्रा में महिला समूहों द्वारा लघु उद्योगों की स्थापना भी की जा सकती है।
शहरी आजीविका मिशन से जुडी उपासना स्वसहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती वीणा वंत्रप ने बताया की उनका समूह वर्ष  2007  से  सरकार की महत्वाकांक्षी मध्यान भोजन योजना से जुड़ कर सेवा कार्य कर रहा है। लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से लगे लॉकडाउन में स्कूलों के बंद होने से कार्य प्रभावित हुआ है।

इस दौरान समूह की महिला सदस्य जो सभी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार से है उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। ऐसे में मध्यप्रदेश शासन द्वारा आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की संकल्पना ने महिलाओं को नई दिशा देने का काम किया। और महिलाओं ने कुछ नया करने की ठानी।  फिर शुरू हुआ “वेस्ट टू  बेस्ट” करने का रोजगार मूलक अभियान। महिलाओं ने सबसे बड़ी स्थानीय समस्या को पकड़ा और बना दिया राख से बर्तन धोने का सस्ता साबुन। समूह द्वारा डिश वाश टब और टिकिया दोनों तरह के साबुन तैयार किये जा रहे है।
समूह की सदस्य गीताबाई नागले और अनीता चौरसिया बताती है की पहले तो समझ नहीं आया की ये काम कैसे होगा कई बार कंटेट कम ज्यादा होने से समस्याएं आई लेकिन जहाँ चाह वहीँ राह अंततः फार्मूला तैयार हो गया और समूह ने कर दिखाया।

आज हमारा यूनिक प्रोडक्ट बाजार के लिए तैयार है जो बाज़ार में बिकने वाले बर्तन बार से कम नहीं है। बल्कि उससे सस्ता और अच्छा ही है। राख से बर्तन धोने की परंपरा कोई नई नहीं है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रो में महिलाये बहुतायत मात्रा में राख से ही बर्तन मांजने को प्रमुखता देती है। बस उसी राख को साबुन की शक्ल मे झाग युक्त बनाया गया है।  इसमें प्लांट से निकलने वाली कोयले की निःशुल्क राख का प्रयोग किया है। जिससे साबुन की  लागत भी कम है। और महिलाओं को साबुन की बिक्री पर 40 % की बचत हो रही है। हालांकि अभी जगह की कमी और संसाधनों का  आभाव जरूर है। फिर भी कुछ कर दिखने के लिए महिलाओं के हौसले बुलंद है।
समूह की महिलाओं का कहना है कि इस काम को महिला समूह ने अपनी बचत की राशि से ही शुरू किया है। उनका कहना  है कि यदि शासन -प्रशासन द्वारा उन्हें उचित  सहयोग व् मार्गदर्शन दिया जाता है तो वे बड़े पैमाने पर उद्योग की स्थापना करने के लिए तैयार है। साथ ही यदि कोई अन्य समूह इस काम को शुरू करना चाहता है तो उसे प्रशिक्षण देने के लिए भी तैयार है।

जिला मुख्यालय पर संचालित आजीविका स्टोर - खरीदी करते नवागत कलेक्टर -  श्री अमनबीर सिंह बैंस
जिला मुख्यालय पर संचालित आजीविका स्टोर – खरीदी करते नवागत कलेक्टर –  श्री अमनबीर सिंह बैंस

 आजीविका स्टोर लगाएंगे हर वार्ड में 

मध्यप्रदेश सरकार का महिला सशक्ति करण एवं महिला समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने हेतु आजीविका स्टोर का प्रयोग पूर्णतः सफल साबित हुआ है। फिलहाल ये स्टोर्स जिला मुख्यालय कार्यालयों पर ही संचालित है। जिससे आम जनता की पहुंच में नहीं है। उपासना स्वसहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमति वीणा वंत्रप का मानना है कि यदि इसी तरह इन स्टोर्स का संचालन चलित आजीविका स्टोर्स के रूप में किया जाता है तो अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार से जोड़ा जा सकता है। साथ ही अन्य समूहों के उत्पादों को भी एक स्थान पर प्रत्येक वार्ड में में उपलब्ध कराया जा सकता है।

स्थाई सदस्यता अभियान चलाएगा समूह 

मध्यप्रदेश शहरी आजीविका अंतर्गत पंजीकृत उपासना स्व सहायता समूह के इस अभिनव प्रयास में अब धीरे धीरे सारनी के आलावा पाथाखेड़ा ,शोभापुर बगडोना तक की महिलाएं जुड़ कर सारनी में लघु उद्योग की स्थापना हेतु संकल्पित हो गई है। जिनके द्वारा प्रथम चरण मर राखयुक्त बर्तन धोने के साबुन के आलावा कपड़े धोने का साबुन ,  देसी फिनाईल , हैंडवाश , बैग आदि निर्मित कर  पालिका क्षेत्र के 36 वार्डो में चलित आजीविका स्टोर्स के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पंहुचाया  जायेगा ।

इस हेतु समूह द्वारा 1000 स्थाई सदस्यों का पंजीयन कर डिस्काउंट कार्ड उपलब्धकराने का लक्ष्य निर्धारित किया है । जिसके द्वारा खरीदी किये जाने पर समुह द्वारा निर्मित प्रोडेक्ट की खरीदी पर समूह 10 % से 50 % तक डिस्काउंट देगा। ताकि समूह के द्वारा निर्मित प्रोडक्ट रूटिंग में  बिक सके। और समूह की महिलाओं को स्थाई रोजगार उपलब्ध हो सके।

समूह ने इस हेतु 1000 स्थाई सदस्यों के  पंजीयन का  लक्ष्य  चार भागों के विभाजित किया है।  जिसमे सारनी में -200 स्थाई सदस्यों का पंजीयन,पाथाखेड़ा में 200 स्थाई सदस्यों का पंजीयन, शोभापुर में 200 स्थाई सदस्यों का पंजीयन एवं बगडोना में 200 स्थाई सदस्यों का पंजीयन किया जाएगा। स्थाई सदस्यों का पंजीयन के आलावा भी लोग इस चलित आजीविका स्टोर्स के माध्यम से अपनी जरूरत का सामान खरीद सकेंगे लेकिन उन्हें एमआरपी पर ही खरीदना होगा ,डिस्काउंट का लाभ नहीं मिलेगा।