पन्ना टाइगर रिजर्व में बलचरो की होगी अब रेडियो टैगिंग दुनिया में पहला प्रयोग 

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पन्ना से विकास सेन की रिपोर्ट

वल्चर देश ही नहीं पूरी दुनिया से खत्म हो रहे हैं और ऐसे में इनका संसार बसाने और इनको संरक्षित करने का काम अब भारत में पन्ना टाइगर रिजर्व में होने जा रहा है दरअसल इन को संरक्षित करने के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व द्वारा एक अनुभव प्रयोग किया जा रहा है जिसकी मंजूरी डब्लू डब्लू आई देहरादून और एनटीसीए से मिल चुकी है और इसकी टीम भी पन्ना पहुंच चुकी है जो सेटेलाइट के माध्यम से गिद्धों की रेडियो टैगिंग करेंगे और उन्हें संरक्षित करने का काम करेंगे

भारत ही नहीं दुनिया में लगातार बलचर की घटती संख्या के पीछे हर कोई चिंतित है ऐसे में पन्ना टाइगर रिजर्व में एक अनोखा प्रयोग होने जा रहा है पन्ना टाइगर रिजर्व देश का पहला टाइगर रिजर्व होगा जहां बलचरो की रेडियो टैगिंग होगी मतलब रेडियो टैगिंग का मतलब यह है कि गिद्धों को कैसे संरक्षित किया जाए और उनका रहवास और उनसे जुड़े क्रियाकलापों की जानकारी सेटेलाइट के माध्यम से टीम को मिलेगी जिससे गिद्धों का ना केवल संरक्षण होगा बल्कि किस-किस प्रजाति के गिद्ध पन्ना टाइगर रिजर्व में मौजूद है यह भी जानकारी लगेगी

हालांकि पन्ना टाइगर रिजर्व में देखा जाए तो 7 प्रकार के वल्चर प्रजातियां पाई जाती हैं जिनमें 4 प्रवासी और 3 अप्रवासी गिद्धों की संख्या है ऐसे में इनको संरक्षित और पर्याप्त अनुकूल माहौल देने के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने व्यवस्था भी की है लगातार दो महीने चलने वाले इस प्रोग्राम में एक पिंजरा बनाया गया है जिसमें इन गिद्धों को पहले उस माहौल में डालकर उनको रेडियो टैगिंग पहनाई जाएगी और फिर इनके संरक्षित करने का काम किया जाएगा।

वल्चर प्रकृति में संतुलन बनाने का काम करते हैं और जो सड़ा गला अपशिष्ट पदार्थ हैं उनको खाकर पर्यावरण को शुद्धि करण का काम करते हैं ऐसे में अगर इनको संरक्षित करने का यह तरीका सफल होता है तो पन्ना टाइगर रिजर्व देश दुनिया का पहला टाइगर रिजर्व होगा जहां बाघ के साथ-साथ गिद्धों को भी संरक्षित करने का काम किया जाएगा जिस तरह से बाघों को संरक्षित करके पन्ना टाइगर रिजर्व में अपना नाम देश दुनिया में स्वर्णिम अक्षरों से लिखा है वही गिद्धों की बढ़ती संख्या और उनको सुरक्षित माहौल देने के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व गिद्धों के संरक्षण के लिए भी जाना जाएगा।