शासकीय स्कूल भवन निर्माण का काम बंद निर्माण में लापरवाही, अधिकारी मौन

Scn news india

दिलीप पाल 

आमला. विकासखंड के ग्राम छावल में हाई स्कूल भवन का काम समय सीमा मेंं नहीं हो पाया है। दोनों भवन निर्माण का अलग-अलग ठेका है। नीचले भवन का निर्माण पिछले दो साल और ऊपर कक्ष के निर्माण को भी लगभग एक वर्ष बीतने को है, अभी भी दोनों भवन पूर्ण: नहीं हुए है। इन्हें पूरा होने में अभी और समय लगने वाला है। विद्यालय भवन का ग्राउंड फ्लोर बैतूल और ऊपरी कक्ष निर्माण भोपाल की कंपनी कर रही है। लगभग 1 करोड़ 87 लाख रूपये की लागत से स्कूल बनना है, लेकिन न तो निर्माण पूरा हुआ है और गुणवत्ता पर ध्यान है। यहां तक की पिछले कई महीनों से काम भी बंद पड़ा है। केवल छोटे-छोटे कामों को पूरा किया जा रहा है, उसमें भी जमकर गुणवत्ताहीन रेत का उपयोग हो रहा है। निर्माण में पीआईयू विभाग के उचित मापदंडों को भी नहीं अपनाया जा रहा। जिससे भवन काफी कमजोर स्थिति में रहेगा।

एक बार तोड़ा जा चुका भवन निर्माण

शासकीय हाई स्कूल भवन का नीचला हिस्सा एक बार तोड़कर पुन: निर्माण किया जा चुका है। निर्माण में तकनीकी खामी थी, जिसका बाद में सुधार किया गया। उस समय भी पीआईयू विभाग ने निर्माण पर ध्यान नहीं दिया और ठेकेदार ने ड्राईंग के अनुसार निर्माण न करते हुए डायरेक्शन बदल दी थी। यह चूक सामने आने के बाद स्कूल भवन का कुछ हिस्सा तोड़कर फिर से बनाया गया। जिसमें भी काफी समय बीत गया। अब जबकि निर्माण पूरा हो जाना था, उस वक्त भी काम बंद पड़ा है।

घटिया निर्माण को लेकर पीआईयू की चुप्पी

अगर निर्माण कार्य समय सीमा में भवन का निर्माण पूर्ण हो जाना था, लेकिन विगत दो वर्षों से अधिक समय हो जाने पर भी स्कूल भवन के नीचले हिस्से का काम आधा अधूरा ही लटका पड़ा है। बार-बार ठेकेदार अपना कार्य रोक देते हैं। वर्तमान में भी स्कूल भवन निर्माण कार्य बंद है। अधिकारियों का निर्माण की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान नहीं है, जबकि शासन द्वारा करोड़ों खर्च करके बच्चों की सुविधा हेतु स्कूल भवन निर्माण कराया जाना सुनिश्चित किया था, किंतु भवन निर्माण में लापरवाही एवं घटिया स्तर की सामग्री लगाकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। फिर भी क्या कारण है कि पीआईयू विभाग चुप्पी साधे बैठा है।

किसी को भी नहीं है फिक्र भगवान भरोसे विभाग

अधूरे पड़े निर्माण की गति बढ़ाने के लिए कई जिम्मेदार लोग बैठे हुए है, परंतु किसी को फिक्र नहीं है। क्योंकि विभाग भगवान के भरोसे ही चल रहा है और जनप्रतिनिधि और तकनीकी विभाग भी कोई काम नहीं कर रहा है, जिससे कि स्वीकृत हुए भवनों का निर्माण आगे बढ़ सके, जबकि ऊपरी कक्ष निर्माण शुरू होने के दस माह में ही पूर्ण हो जाना था, लेकिन काम की मंथर गति और अधिकारियों की लापरवाही के कारण निर्माण अभी भी पूरा नहीं हो पाया है और जो छोटे-छोटे काम वर्तमान में हो रहे है उसमें भी जमकर लोकल रेत उपयोग की जा रही है।

इनका कहना है…….

ठेकेदारों का भुगतान नहीं हुआ है। जिसकी वजह से काम बंद पड़े है। जहां तक निर्माण में गुणवत्ता की बात है तो इसकी जांच की जायेगी।

जीएस बारस्कर, एसडीओ, पीआईयू विभाग, आमला